भोपाल ।राजधानी में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का काम आज तक पटरी पर नहीं आ पाया है। ज्यादातर कॉलोनियों में कचरा कलेक्शन का समय ही तय नहीं है, इससे लोग कचरा बाहर फेंक रहे हैं। यही नहीं कॉलोनियों से कचरा नहीं उठने पर इसे आग के हवाले किया जा रहा है। ऐसे में स्वच्छता रैंकिंग बिगड़ना तय है। मालूम हो कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के पैरामीटर्स तीन महीने पहले ही जारी हो चुके हैं। अप्रैल से निगम प्रशासन स्वच्छता अभियान में जुट भी चुका है, लेकिन अब तक कचरा कलेक्शन का काम ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है। निगम प्रशासन ने डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की स्थिति बेहतर करने के लिए सभी वार्डों का ट्रिप चार्ट, रूट चार्ट तैयार कर कमांड कंट्रोल सेंटर को सौंपा है, कचरा वाहनों में लगे जीपीएस के आधार पर ऑपरेटरों की मदद से पूरे सिस्टम की मॉनिटरिंग किया जाना है पर यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो पाई है। इधर, सुबह 6 से 9 बजे तक फील्ड में रहने के निर्देश दिए गए हैं। इतना सब होने के बाद भी कॉलोनियों में कचरे का ढेर देखा जा सकता है। निगम अधिकारियों का कहना है कि गाड़ियों की कमी से कचरा कलेक्शन में समस्या हो रही है। खासबात ये है कि इस बार पूरे साल के प्रदर्शन के परिणामों के मूल्यांकन के आधार पर अंतिम रैकिंग में अंक मिलेंगे। पहले त्रैमासिक रैंकिंग अप्रैल से जून और दूसरी जुलाई से सितंबर के बीच होगी। त्रैमासिक आकलन को स्वच्छ सर्वेक्षण लीग नाम दिया गया है। इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण 2020 के 3000 अंक और 1000 अंक लीग के साथ सर्वेक्षण को जोड़कर कुल 4000 अंकों का होगा। जनवरी में टीम आकर कामों का भौतिक सत्यापन करेगी। जानकारी गलत पाई जाती है तो निगेटिव अंक भी मिलेंगे। बता दें कि स्वच्छ सर्वे 2017 और 2018 में भोपाल दूसरे नंबर पर था, लेकिन 2019 में 19 पायदान पर खिसक गया।
गत मई में स्वच्छता का प्रभारी अपर आयुक्त मयंक वर्मा से लेकर अपर आयुक्त राजेश राठौर को सौंप दिया गया।     विधानसभावार अपर आयुक्त व उपायुक्तों को जिम्मेदारी सौंप दी है। इसके बाद चार नए स्वास्थ्य निरीक्षकों को सहायक स्वास्थ्य निरीक्षक (एएचओ) बनाया गया। जलकार्य के पर्यवेक्षक शोएब अली को एएचओ जोन 7 का प्रभार दिया गया है। वहीं, जोन 17 के एएचओ अजय श्रवण को जोन 18 भेजा गया है। महेश गौहर को चार पांच महीने में वापस 17 के एएचओ का दायित्व सौंप दिया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों राजीव सक्सेना, राकेश शर्मा का अतिरिक्त एएचओ के प्रभार से मुक्त कर पहले की तरह जोन का जिम्मा सौंपा गया है। बताया जा रहा है कि नए जोन का समझने में पांच से छह महीने का समय लगता है, ऐसे में सफाई व्यवस्था को पटरी पर आने में और समय लगेगा। साफ-सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए अब वार्ड प्रभारियों की भूमिका तय की गई है। वार्ड प्रभारियों को निर्देशित किया है कि यदि किसी क्षेत्र में गंदगी पाई जाती है तो दरोगा के साथ वार्ड प्रभारी भी इसके लिए जिम्मेदार होंगे। ऐसे में राजस्व वसूली पर असर पड़ना तय है। इस साल नगर निगम ने तीन नए अभियान शुरु किए है। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के समय ही गीला सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र करने के लिए ट्वीन बिन चैलेंज शुरू किया गया है। भोपाल प्लस एप में दो डस्टबिन अपलोड करने पर ईनामी कूपन दिए जा रहे हैं। जिसमें डेटा, रेड बसों में सफर करने, चार्टर्ड बाइक, स्मार्ट पार्किग में फ्री सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। गोल्डन लीफ (सुनहरे पत्ते) अभियान के तहत विभिन्न कॉलोनियों के रहवासी समितियों से संपर्क कर उन्हें सूखे पत्तों से खाद बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। निगम अफसरों का दावा है कि इस अभियान के बाद शहर में सूखे पत्तों में आग लगने की समस्या 50 फीसदी घट गई है। 'कैरी ऑन बैग एवं कैरी ऑन बॉटल' अभियान के तहत तीन प्रमुख बाजारों में टेलर बैठाए गए हैं, जो पुराने कपड़े लेकर निःशुल्क थैला बनाकर दे रहे हैं। मकसद है लोग पॉलीथिन का उपयोग न करें। इस संबंध में नगर निगम के अपर आयुक्त राजेश राठौर का कहना है कि डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का सिस्टम डेवलप किया गया है, इसमें पूरी तरह से अमल होने में दो-तीन महीने का समय लगेगा। गाड़ियों की कमी से कचरा कलेक्शन में समस्या हो रही है। पैरामीटर्स के आधार पर इस बार स्वच्छता सर्वे की तैयारी चल रही है।