एक बार की बात है प्रभु यीशु एक झील के किनारे उपदेश दे रहे थे। वहां उपस्थित लोगों को वो बता रहे थे कि 'एक बार एक किसान ढेर सारे बीज लेकर अपने खेत में बोने ले जा रहा था। उसी समय रास्ते में उससे कुछ बीज गिर गए। उनमे से कुछ बीज पक्षियों ने चुग लिए, जबकि कुछ बीज पथरीली जमीन पर गिरे तो कुछ नमी वाली जमीन जा गिरे। पथरीली जमीन पर बीजों की जड़े अधिक परिपक्व नहीं हो पाई, इसलिए वे जल्द ही सूख गए। जबकि जो बीज नमी बाली उपजाऊ जमीन पर गिरे वो मजबूती के साथ पौधे में तब्दील हो गए और उनमें बालियां आ गईं और वो दानों से भर गईं। यह बताने के बाद प्रभु यीशु शांत हो गए। कुछ देर खामोश रहने के बाद उन्होंने फिर कहा कि प्रभु का उपदेश देने वाला गुरु बीज बोने वाले किसान की तरह होता है। वह अपने भक्तों के मन एवं हृदय में परमात्मा का संदेश रूपी बीज बोता है। कुछ भक्त पथरीली धरती की तरह होते हैं। ऐसे लोगों को अपने गुरु पर तुरंत विश्वास होता है और तुरंत विश्वास टूट भी जाता है। ऐसा इसलिए है क्योकि वो तो सांसारिक चिंताओं से वशीभूत होते हैं। शेष भक्तों का हृदय नमी वाली जमीन की तरह उपजाऊ होता है। ऐसे भक्त सन्देश को श्रद्धा पूर्वक ग्रहण करते और उसे आगे बढ़ाते हैं। वे स्वयं इसका आनंद लेते और आनंद की वर्षा में भीगते हैं और उसी में दूसरों को भी भिगोते हैं। यही जीवन की सच्चाई है।