विशेष एनआईए कोर्ट ने मुंबई के एक कारोबारी को 30 अक्टूबर 2017 को एक विमान का अपहरण करने की धमकी देने के मामले में उम्रकैद व पांच करोड़ रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इस अनूठे मामले में कठोर सजा सुनाते हुए कहा कि जुर्माने की राशि विमान के चालक दल के उन सदस्यों व यात्रियों को बांटी जाए, जो उस दिन उसमें सवार थे।

अंग्रेजी व उर्दू में लिखा था पत्र
विशेष एनआईए जज केएम दवे ने कारोबारी बिरजू सल्ला को यह सख्त सजा सुनाई है। विमान में सवार सल्ला ने अंग्रेजी व उर्दू भाषा में लिखा धमकी भरा पत्र जेट के मुंबई से दिल्ली जा रही फ्लाइट संख्या 9डब्ल्यू 339 के टॉयलेट में टिश्यू पेपर बॉक्स में रख दिया था।

नो फ्लाई लिस्ट में पहला यात्री
इस करतूत के बाद पकड़े जाने पर सल्ला देश का पहला ऐसा व्यक्ति बन गया था, जिन्हें 'नेशनल नो फ्लाई लिस्ट' में रखा गया था। यानी देशभर में किसी भी विमान में सफर पर पाबंदी लगा दी गई थी। इसके साथ ही वह देश का पहला व्यक्ति बना था, जिस पर नए व कठोर विमान अपहरण रोधी कानून-2016 के तहत केस दर्ज किया गया था। यह कानून 1982 के पुराने कानून की जगह लाया गया है।

 

अहमदाबाद एयरपोर्ट पर दबोचा था
अपहरण की धमकी दिए जाने पर उक्त विमान की अहमदाबाद में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। वहां विमान उतरते ही सल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में मामले की जांच एनआईए को सौंपी गई थी। एनआईए ने पिछले साल जनवरी में सल्ला के खिलाफ नए एंटी हाईजैकिंग कानून-2016 के तहत आरोप-पत्र दायर किया था। एनआईए कोर्ट ने अपने फैसले में माना है कि आरोपित ने जानबूझकर यह कृत्य किया। इससे विमान के यात्रियों व चालक दल की सुरक्षा खतरे में पड़ गई थी।

गर्लफ्रेंड की खातिर रची साजिश
जांच के दौरान सल्ला ने न केवल अपना गुनाह कबूल किया, बल्कि उसने बताया कि उसने ऐसा इसलिए किया ताकि जेट एयरवेज इस खतरे के कारण दिल्ली की यह उड़ान निरस्त कर दे और जेट के दिल्ली ऑफिस में काम करने वाली उसकी गर्लफ्रेंड वापस मुंबई आ जाए। धमकी भरे पत्र में उसने लिखा था कि विमान को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) ले जाया जाए। पत्र के अंत में लिखा था, 'अल्लाह महान है।'