राजनांदगांव । शिक्षा का अधिकार भर्ती प्रक्रिया में विगत एक वर्ष से जिस प्रकार से जिले में गड़बड़ी हो रही है, उसका जवाब शिक्षा विभाग के पास नहीं है। पीड़ित पालक विगत एक वर्ष से अपने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दिलवाने भटक रहे है। बीते वर्ष सैकड़ों पात्र गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा से वंचित कर दिया गया। पीड़ित पालकों ने अनेकों लिखित शिकायत किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पाया और इस वर्ष भी आरटीई भर्ती विवादों की भेंट चढ़ गया।
पोर्टल में गड़बड़ी और नोडल अधिकारियों की लापरवाही से निजी स्कूलों को जरूर लाभ पहुंचता दिख रहा है, क्योंकि उनके स्कूलों में कम गरीब बच्चों प्रवेश दिया जा रहा है। डीपीआई के आदेशानुसार 2 मई को ऑन-लाईन लॉटरी निकाला गया, लेकिन कई जगहों में भारी गड़बड़ी की शिकायत के पश्चात् पुनः 3 जून को डीपीआई के ई-मेल को आधार बताकर ऑन-लाईन निकाला गया, लेकिन यह भी विवादों की भेंट चढ़ गया। लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर से जिला शिक्षा अधिकारी को प्राप्त ई-मेल को आधार बनाकर 3 जून को शिक्षा का अधिकार के अंतर्गत लाठी के दम पर पुनः ऑन-लाईन लॉटरी निकाला गया जिसका अब पालक विरोध कर रहे है, क्योंकि डीपीआई रायपुर के ई-मेल में यह स्पष्ट लिखा है कि दो प्रकार के स्कूलों में लॉटरी निकाला जाना है जिसमें पहला वह स्कूल जिसमें आरक्षित सीटों से अधिक सीटों पर लॉटरी निकल गया था और दूसरा वह स्कूल जिसमें आरक्षित सीट से कम सीटों पर लॉटरी निकल गया था। उक्त इन्ही दो प्रकार के स्कूलों में ही लॉटरी निकालने का आदेश हुआ था।
वेसलियन इंग्लिश मिडियम स्कूल, टांकापारा राजनांदगांव के कक्षा पहली और नर्सरी के लिये 19-19 सीटें आरक्षित था और 2 मई को इस 38 सीटों के लिये ऑन-लाईन लॉटरी निकाला गया था, उसी प्रकार नीरज पैरेंट्स स्कूल, बल्देवबाग, राजनांदगांव के कक्षा पहली के लिये 20 सीट्स आरक्षित था और और 2 मई को इस 20 सीटों के लिये ऑन-लाईन लॉटरी निकाला गया है।
इन स्कूलों में जहां आरक्षित सीटों के अनुसार लॉटरी निकाला जा चुका है, वहां उस चयन सूची को निरस्त कर पुनः लॉटरी निकालने का कोई आदेश डीपीआई ने नहीं दिया है, लेकिन इन दोनों स्कूलों में भी 2 मई को निकाले गये ऑन-लाईन लॉटरी को निरस्त कर पुनः लॉटरी निकाल दिया गया। ऐसी गलती कई और नोडलों ने भी किया है, जिसको लेकर अब पालक लिखित शिकायत लेकर कलेक्टर से मिलने भटक रहे है। कई पालकों के द्वारा 3 जून को कलेक्टर से मिलने कई घंटे इंतजार करते रहे और पुनः 6 जून को कलेक्टर से मिलने की उम्मीद लेकर गये पालको को निराश होकर लौटना पड़ाए क्योंकि कलेक्टर दौरे में थे।