मनुष्य जीवन में ग्रहों का बेहद प्रभाव पड़ता है। सभी लोगों के जीवन में सही या गलत कर्म का फल देना शनि के हाथ में ही है। शनि न्याय के देवता हैं और वह कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। इसलिए शनि ग्रह को कर्म का कारक माना गया है। शनि ग्रह को कुंडली में दशम भाव और अष्टम भाव के साथ साथ आजीविका और मृत्यु का कारक माना गया है। यही वजह है कि कुंडली में शनि के शुभ स्थान पर न होने पर व्यक्ति को रोजगार मिलना बहुत ही कठिन हो जाता है। मान्यताओं के अनुसार शनि गलती करने पर दंड देने में किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं करते हैं।
इस प्रकार जाने कुंडली में अशुभ है शनि  
जन्मकुंडली में शनि यदि मेष राशि अर्थात अपनी नीच राशि मे स्थित हो।
हमेशा नौकरी में कोई न कोई परेशानी बनी रहती हो।
यदि किसी असाध्य रोग ने घेर लिया हो।
अचानक आप पर सरकारी जुर्माना लग जाये।
परिवार में शाम के बाद अकारण कलह होने लगें।
शनि से शुभ परिणाम इस प्रकार मिलेंगे
अपने माता पिता का सम्मान करें।
किसी भी हरे भरे पीपल या बरगद के पेड़ को न काटे।
घर की पश्चिम दिशा को साफ सुथरा रखें और भूलकर भी वहां पानी न रखें।
किसी भी तरह गलत व्यक्ति या अपराधी का साथ न दें।
किसी जरूरतमंद या निर्धन व्यक्ति का धन न हड़पे।
शनि को प्रसन्न करने का उपाय :
किसी भी शनिवार के दिन शनि की पूजा या तो सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद ही करें।
हर शनिवार के दिन शाम के समय जरूरतमंद लोगों को सरसों के तेल से बना खाना अवश्य खिलाएं।
पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल या सरसों के तेल का दीया अवश्य जलाएं और सात परिक्रमा करें।
रोज सूर्यास्त के बाद एक रुद्राक्ष की माला से शनि के मंत्र का जाप करें।
शनि का मंत्र है " ॐ शं शनिश्चराये नमः।"