मण्डला ।  कोई नई सुनता साब, सब सिर्फ ठेकेदारों की सुनते हैं। उसके लोग 10 का 20 वसूल कर रहे हैं, जिस पक्की दुकान के सामने की सड़क पर बोरी बिछाते हैं वो दुकानदार महीने का किराया अलग लेता है। बच्चों को पालना है सो सब सह रहे हैं। यह विवशता है उन सब्जी व्यापारियों की, जो हागगंज की सड़कों पर सब्जी की दुकान लगाते हैं और इसके एवज में नगरपालिका को प्रतिवर्ष 25-30 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। जिले भर में एक मात्र सब्जी मंडी ऐसी है जहां के सब्जी व्यापारियों को अपनी अस्थाई दुकानें लगाने के लिए न केवल नगरपालिका के ठेकेदार को बल्कि उन दुकानदारों को भी भुगतान करना पड़ रहा है जिन दुकानदारों की पक्की दुकान के सामने से गुजर रही सड़कों पर सब्जी व्यापारी बोरी बिछाकर सब्जियां बेच रहे हैं। यह भर्राशाही चल रही है जिला मुख्यालय स्थित हागगंज बाजार की सब्जी मंडी में। दरअसल यह सिर्फ नाम की मंडी है, नगरपालिका प्रशासन द्वारा पूरा सब्जी बाजार सड़कों पर ही लगवाया जाता है और सड़कों पर लगने वाली दुकानों से शुल्क वसूली का ठेका नीलाम किया जाता है और यह सिलसिला अभी से नहीं शुरु से यानी पिछले लगभग 50 वर्षों से चला आ रहा है। इस वर्ष का सब्जी मंडी का ठेका लगभग 29 लाख रुपए मे नीलाम किया गया है।
दुकानदार भी सब्जी व्यापारियों से अवैध वसूली कर रहे हैं
हागगंज के सुपर मार्केट क्षेत्र से अस्पताल की ओर जाने वाले पुल और उसके तीनों ओर की सड़कों के किनारे बोरी बिछाकर सब्जियां बेचने के एवज में ठेकेदार सब्जी व्यापारियों से शुल्क वसूली कर रहे हैं। साथ ही उक्त सड़क जिन पक्की दुकानों के सामने से गुजर रही हैं, वे दुकानदार भी सब्जी व्यापारियों से अवैध वसूली कर रहे हैं। ज्यादातर पक्की दुकानदारों द्वारा सब्जी व्यापारियों से यह कहकर वसूली की जा रही है कि वे उनकी दुकानों के सामने अपनी अस्थाई दुकानें लगा रहे हैं इसके एवज में उन्हें किराया देना होगा। जगह की कमी झेलते सब्जी व्यापारी नगरपालिका के ठेकेदार के अलावा इन पक्की दुकानदारों का भी भुगतान करने को बेबस हो रहे हैं। सब्जी व्यापारियों का कहना है कि इस अवैध वसूली की कहीं कोई सुनवाई नहीं है। चाहे पक्की दुकान वाले हों या मंडी के ठेकेदार, नगरपालिका उनके विरोध में कुछ सुनने को तैयार ही नहीं। शिकायत करो तो कहा जाता है कि लिखित शिकायत करो, लिखित शिकायत करें तो दिन में चार बार नगरपालिका बुलवाते हैं, ऐसे में सब्जी बेचें या नगरपालिका जाकर कर्मचारियों की मनमानी झेलें। दूसरी ओर, नगरपालिका जाओ तो दुकान में मवेशी धावा बोल देते हैं और पूरी सब्जी चट कर जाते हैं। यही कारण है कि मनमानी झेलने को बेबस हैं क्योंकि बच्चों का पालन पोषण करना है।
10 रुपए के बजाय 20 रुपए की वसूली कर रहे
हागगंज की सड़कों पर दुकानें लगाने के एवज में सब्जी व्यापारियों को ठेकेदार को 10 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से शुल्क दिया जाना चाहिए लेकिन ठेकेदारों के कर्मचारी अधिकतर सब्जी व्यापारियों से 10 रुपए के बजाय 20 रुपए की वसूली कर रहे हैं। इसका तर्क दिया जाता है कि सब्जी व्यापारी निर्धारित जगह से अधिक जगह घेरकर दुकानें लगा रहे हैं। चार-गुणा-चार की जगह के लिए 10 रुपए निर्धारित हैं। इसके उलट सब्जी व्यापारियों का कहना है कि इतनी सी जगह में सिर्फ तीन टोकनी, तराजू ही रखे जा सकते हैं। खुद के बैठने के लिए जगह नहीं बचती। परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटानी है इसलिए 20 रुपए दे रहे हैं। विरोध करने जाएं तो ठेकेदार के कर्मचारी दुकानें लगाने नहीं देते।