जबलपुर।  मौसम की प्रतिवूâलता के कारण जनजीवन का मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। हर दूसरे घर में सर्दी, खांसी बुखार के साथ-साथ हर पूâटन (बदन दर्द) के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। हैजा, डायरिया का प्रकोप भी चल रहा है। सरकारी अस्पतालें हों या प्रायवेट अस्पतालें, सब हाऊसपुल चल रहे हैं। ग्रीष्म ऋतु में इन दिनों जब तापमान औसत से अधिक चल रहा है तब मौसम कभी शुष्क रहता है, कभी आसमान पर बादल छा जाते हैं। कभी हल्की बूंदाबांदी हो जाती है, जिससे उमस बढ़ती है। मौसम के इस मिश्रित हालातों में सूक्ष्म वैक्टीरिया तेजी से पनप रहे हैं। खासकर मच्छरों की पैदावार बढ़ने से वे खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री और पानी में मच्छरों के बैठने से संक्रामक रोग बढ़ रहे हैं।जिला अस्पताल विक्टोरिया के संक्रमण वार्ड मरीजों से हाऊसपुâल चल रहा है। कमोबेश यही स्थिति शहर के निजी अस्पतालों की भी है। इस मौसम में डायरिया, वैâ-दस्त के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं वायरल फीवर ने भी जोर पकड़ लिया है। अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की कतारें लगी हुई हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में गरिष्ठ भोजन भी नुकसानदायक है। ज्यादा तेल, घी, मिर्च-मसाले वाला भोजन जल्दी डायजेस्ट नहीं हो पाता, जो वैâ-दस्त का कारण बनता है। इसके अलावा बाजारों में खुले में बिकने वाली खाद्य सामग्री सबसे ज्यादा खतरनाक है। खाद्य पदार्थों और पीने के पानी में अगर मच्छर बैठ जाए तो डायरिया होना निश्चित है। इसी कारण मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। साफ स्वच्छ पानी और हल्का व ताजा भोजन ही बचाव का मुख्य साधन है। इस सीजन में बाजारों में मिलने वाली खुली खाद्य-सामग्री से लोगों को बचना चाहिए।