नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत हुई है. इस बार के चुनाव में कई खिलाड़ी शामिल थे जिनमें सबसे चर्चित नाम टीम इंडिया के सर्वश्रेष्ठ ‘ओपनर’ में से एक गौतम गंभीर का रहा. अपने क्रिकेट करियर की तरह राजनीति में आगाज के साथ ही कई उतार चढाव झेलने वाले गंभीर चुनाव की पिच पर शानदार ओपनिंग करते हुए पूर्वी दिल्ली सीट से भाजपा के टिकट पर अपने निकटतम उम्मीदवार से 3,91,222 मतों से जीत गए हैं.  

किससे था गंभीर का मुकाबला
गंभीर ने पिछले साल के आखिर में ही क्रिकेट से संन्यास लिया था. वे पिछले तीन सालों से टीम इंडिया से बाहर चल रहे थे. लोकसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा में शामिल हुए गंभीर का सामना कांग्रेसी दिग्गज अरविंदर सिंह लवली और आम आदमी पार्टी की आतिशी से था जिन्होंने चुनावी अभियान के दौरान उन पर कई तरह के आरोप भी लगाये थे. बतौर क्रिकेटर अपनी लोकप्रियता, सामाजिक सरोकार और ‘मोदी लहर’ के दम पर चुनाव में गंभीर अपने पदार्पण मैच में ही नाबाद सैकड़ा जड़ने जा रहे हैं. 

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क्या कहा बड़ी बढ़त पर गंभीर ने
 गंभीर ने चुनाव आयोग द्वारा जारी रूझानों के दौरान  ट्वीट में लिखा, ‘‘यह ना तो ‘लवली कवर ड्राइव’ और ना ही ‘आतिशी बल्लेबाजी’ बल्कि भाजपा की ‘गंभीर’ विचारधारा को लोगों का समर्थन है. सभी को धन्यवाद.’’ उन्होंने आगे लिखा ,‘‘ इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने अपना जमीर और ईमान खोया है और आठ महीने में अपनी सत्ता खोयेगा. जितना कीचड़ आप ने दिल्ली में फैलाया है, उतना ही कमल दिल्ली में खिलेगा.’’ 

यहां था गंभीर का इशारा
गंभीर का इशारा मतदान से ठीक पहले आतिशी और आप द्वारा उन पर महिला विरोधी पर्चे बंटवाने के आरोपों पर था. आतिशी ने गंभीर पर उन्हें बदनाम करने के लिए ऐसे पर्चे बांटने का आरोप लगाया और वह प्रेस कांफ्रेंस में रो भी पड़ी थी. गंभीर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर यह पूरी साजिश रचने का आरोप लगाते हुए चुनौती दी थी कि या तो वे आरोप साबित करें या राजनीति छोड़ दें.

Gambhir 

चुनाव आयोग से की थी यह सिफारिश
इससे पहले भी उन्होंने गंभीर पर दो वोटर आई डी रखने के आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से उनकी उम्मीदवारी रद्द करने की सिफारिश भी की थी. गंभीर 22 मार्च को ही भाजपा में शामिल हुए. उनका यह फैसला हालांकि चौकाने वाला नहीं रहा क्योंकि देश और समाज से जुड़े मसलों पर उनकी बेबाक टिप्पणियों के चलते, उनके राजनीति में आने के कयास काफी समय से लगाये जा रहे थे. 

मोदी ने लिखा था पत्र
पिछले साल दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस पत्र के बाद ये अटकलें तेज हो गई थीं जिसमें उन्होंने क्रिकेट से संन्यास के बाद गंभीर को भारतीय क्रिकेट टीम के लिए उनके प्रदर्शन को लेकर बधाई देते हुए कहा था कि भविष्य में कई दूसरी पारियों का इससे आगाज होगा. मोदी ने पत्र में लिखा था, ‘‘इस निर्णय से एक नहीं, बल्कि आपके जीवन की कई दूसरी पारियां शुरू होंगी. आपके पास अन्य पहलुओं पर काम का समय और अवसर होगा जिसके लिए पहले आपको समय नहीं मिल रहा था.’’ 

आक्रामक तेवर रहे गंभीर के हमेशा
दिल्ली के राजिंदर नगर इलाके में रहने वाले और बाराखम्बा रोड स्थित माडर्न स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी करने वाले एवं दो बार के आईपीएल विजेता टीम (केकेआर) के कप्तान गंभीर क्रिकेट के मैदान पर भी अपने आक्रामक तेवरों के लिए विख्यात थे. कई बार क्रिकेट पंडितों को उनकी आक्रामकता नागवार भी गुजरी लेकिन उनके साथी खिलाड़ियों को बखूबी पता था कि यह उनका जोश बढ़ाने के लिए थी. 


सोशल मीडिया पर रहे हमेशा एक्टिव
गंभीर पिछले काफी समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे. राजनीति में आने से पहले ही वे पाकिस्तान और आतंकवाद के खिलाफ टिप्पणी करने के मामले में वे हमेशा आगे रहे. चुनाव से एक महीना पहले ही भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे. आठ साल पहले वानखेड़े स्टेडियम पर विश्व कप फाइनल में खेली गई 97 रन की पारी हो या 2007 में पहले टी20 विश्व कप फाइनल में 54 गेंद में बनाये 75 रन हों, गौतम गंभीर हमेशा ही बड़े मैचों के खिलाड़ी रहे हैं और राजनीति की पेचीदा पिच पर भी उन्होंने धुआंधार पारी खेलने के संकेत दे डाले हैं.