नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election Result 2019) में एनडीए की शानदार जीत इस बात का संकेत है कि वृहद आर्थिक नीति अगले पांच साल तक जारी रहेगी. ब्रोकरेज और अर्थशास्त्रियों ने कहा कि नई सरकार के समक्ष मुख्य चुनौती आर्थिक सुधारों को जारी रखने की होगी. आईएचएस मार्किट ने चुनाव नतीजों पर एक नोट में कहा कि राज्यसभा में अभी भाजपा के पास बहुमत नहीं है. ऐसे में पार्टी के लिए विधायी सुधार एजेंडा को आगे बढ़ाने में अड़चन आएंगी.

भाजपा सरकार के लिए आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक
चुनौतियों के बावजूद मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के लिए आर्थिक परिदृश्य सकारात्मक है. साल 2019-23 के दौरान जीडीपी की वार्षिक वृद्धि दर औसत सात प्रतिशत रहने की उम्मीद है. नोट में कहा गया कि साल 2019 में भारत के दुनिया का पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का अनुमान है और जीडीपी का आकार 3,000 अरब डॉलर को पार जाएगा. इससे भारत ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगा. 2025 तक भारत का जीडीपी जापान को पीछे छोड़ देगा और इससे भारत एशिया प्रशांत की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा.

रफ्तार को रोकने वाली चुनौतियों से निपटना होगा
डन एंड ब्रैडस्ट्रीट के मुख्य अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा कि नई सरकार को मौजूदा वृद्धि की रफ्तार को रोकने वाली चुनौतियों से निपटना होगा. गोल्डमैन साक्स ने कहा कि हमें उम्मीद है कि नई सरकार चार क्षेत्रों में संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान देगी. इनमें कृषि और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में सुधार, भूमि की पारदर्शी नीलामी, रिकॉर्डों का डिजिटलीकरण, निजीकरण, श्रम क्षेत्र में नियामकीय ढांचा तैयार करना और निर्यात संवर्द्धन शामिल है.


यस बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री शुभदा राव ने कहा कि सरकार को इस राजनीतिक अवसर का लाभ उठाते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में और तेजी से निजीकरण और सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए. इससे न केवल राजकोषीय लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी बल्कि सरकारी बैंकों की दक्षता भी बढ़ाई जा सकेगी. राव ने कहा कि इसके अलावा जीएसटी का विस्तार करते हुए इसके दायरे में रीयल एस्टेट, ईंधन उत्पाद, तंबाकू और शराब उत्पादों को लाया जाना चाहिए.