हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ की एक रुद्र नाम की एक गुफा में 17 घंटे अकेले रहकर ध्यान और साधना की। हिन्दुस्तान के बाहर बलोचिस्तान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, बर्मा, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया और श्रीलंका में हिन्दू और बौद्ध धर्म से जुड़ी हजारों गुफाएं आज भी मौजूद है। हिन्दुस्तान में भी हजारों गुफाएं हैं लेकिन यहां प्रस्तुत है केवल 15 गुफाओं के बारे में संक्षिप्त जानकारी। यहां उन्हीं गुफाओं की जानकारी जहां सिर्फ ध्यान, तप या साधना ही किया जाता था। 

1. बाघ की गुफाएं (मध्यप्रदेश, जिला धार)
मध्यप्रदेश के प्राचीन स्थल धार जिले में बाघिनी नामक छोटी-सी नदी के बाएं तट पर और विंध्य पर्वत के दक्षिण ढलान पर स्थित बाघ की गुफाएं इंदौर शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर ही है। इन गुफाओं का निर्माण भगवान बुद्ध की प्रतिदिन होने वाली दिव्यवार्ता को प्रतिपादित करने हेतु निर्मित और चित्रित किया गया था। इसमें कुल 9 गुफाएं हैं जिनमें से 1, 7, 8 और 9वीं गुफा नष्टप्राय है तथा गुफा संख्या 2 'पाण्डव गुफा' के नाम से प्रचलित है जबकि तीसरी गुफा 'हाथीखाना' और चौथी 'रंगमहल' के नाम से जानी जाती है। इन गुफा का निर्माण संभवतः 5वी-6वीं शताब्दी ई. में हुआ होगा।

2.अजंता ऐलोरा की गुफाएं (महाराष्ट्र, जिला औरंगाबाद)
महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर के समीप स्थित‍ अजंता-एलोरा की गुफाएं बड़ी-बड़ी चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं। 29 गुफाएं अजंता में तथा 34 गुफाएं एलोरा में हैं। अब इन गुफाओं को वर्ल्ड हेरिटेज के रूप में संरक्षित किया जा रहा है। अजंता की गुफाओं में 200 ईसा पूर्व से 650 ईसा पश्चात तक के बौद्ध धर्म का चित्रण किया गया है। एलोरा की गुफाओं में हिंदू, जैन और बौद्ध तीन धर्मों के प्रति दर्शाई आस्था का त्रिवेणी संगम का प्रभाव देखने को मिलता है। ये गुफाएं 350 से 700 ईसा पश्चात के दौरान अस्तित्व में आईं। आर्कियोलॉजिकल और जियोलॉजिस्ट की रिसर्च से यह पता चला कि इन गुफाओं को कोई आम इंसान या आज की आधुनिक तकनीक नहीं बना सकती। यहां एक ऐसी सुरंग है, जो इसे अंडरग्राउंड शहर में ले जाती है। महाराष्ट्र के औरंगबाद जिले में ही पीतलखोरा की गुफाएं भी प्रसिद्ध है।

3.बाराबर गुफाएं (गया जिला, बिहार)
बिहार के गया जिले में स्थित बाराबर गुफाएं ध्यान और तपस्या के लिए बनाई गई है। गया जिले में और भी कई हिन्दू, जैन और बौद्ध गुफाएं हैं। ये गुफाएं बाराबर की दो पहाड़ियों में हैं। यहां कुल 4 गुफाएं हैं और नागार्जुन की पहाड़ियों में 3 गुफाएं हैं। ये गुफाएं देश की सबसे प्राचीन गुफाओं में से हैं। यहां कलाकृतियां भी मिलती हैं। इन गुफाओं के अलावा सुदामा और सोनभद्रा भी बिहार की प्रसिद्ध गुफाओं में से एक हैं।

बिहार में सुजात नामक स्थान पर डुंगेश्वरी गुहा मंदिर को महाकाल गुफाओं के नाम से भी जाना जाता है जो बोधगया (बिहार) के उत्तर-पूर्व में 12 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां तीन पवित्र बुद्ध गुफाएं हैं। इन गुफाओं में भगवान बुद्ध ने ध्यान लगाया था। भगवान बुद्ध ने बोधगया आने के पूर्व छह वर्षों तक कठोर निग्रह के साथ इन गुफाओं में तपस्या की थी। यह माना जाता है कि भगवान बुद्ध को यहीं से मध्यम मार्ग का ज्ञान प्राप्त हुआ था। दो छोटे मंदिर इस घटना की याद मे यहां बनाए गए हैं। मूलत: यह हिन्दू धर्म से जुड़ी गुफाएं हैं जो हिंदू देवी डुंगेश्वरी नाम से विख्‍यात है।

4.चंदा देवी की गुफाएं (छत्तीसगढ़, जिला महासमुंद)
चंदा देवी की प्राचीन बौद्ध गुफाएं सिंघधु्रव क्षेत्र में स्थित चंदा देवी की गुफाएं छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सिरपुर कस्बे से करीब 25 किलोमीटर दूर महानदी के किनारे स्थित हैं। यहां बौद्ध दार्शनिक नागार्जुन ने ध्यान किया था। गुफाएं तो छत्तीसगढ़ में बहुत हैं, लेकिन सीताबेंग गुफा सरगुजा जिले के अंबिकापुर की रामगढ़ पहाड़ियों में स्थित है। दरअसल, ये 2 गुफाएं हैं- एक सीताबेंग और दूसरी जोगीमारा। यहां तक पहुंचने के लिए आपको प्राकृतिक टनल हतिपल के रास्ते से जाना होगा। छत्तीसगढ़ के पहाड़ी इलाकों और घने जंगल से होते हुए ही आप कैलाश गुफा, दंडक गुफा और कुटुमसर गुफा तक पहुंच सकते हैं। यह कांगड़ वैली के नेशनल पार्क के पास है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में तो कई गुफाएं हैं।

5.अमरनाथ गुफा (कश्मीर)
अमरनाथ की गुफा में शिवजी ने तप किया था और यहीं पर उन्होंने पार्वती माता को अमरता का प्रवचन दिया था। जम्मू और कश्मीर में तो अमरनाथ और वैष्णोदेवी की गुफा में हिन्दूजन दर्शन के लिए जाते ही हैं, लेकिन कश्मीर में ऐसी 4 गुफाएं हैं जिनके बारे में कहा जा रहा है कि उनका दूसरा सिरा 4,000 किलोमीटर दूर रूस तक जाता है। इतना ही नहीं, इन गुफाओं के बारे में और भी ऐसे रहस्य हैं जिनकी सच्चाई सदियों बाद भी सामने नहीं आईं। जम्मू-कश्मीर के पीर पंजाल में एक गुफा है, जहां एक शिवलिंग रखा है। इसका नाम पीर पंजाल केव रखा गया है। जम्मू में ही शिव खाड़ी नामक एक गुफा है।

6.एलीफेंटा की गुफा (मुंबई, महाराष्ट्र)
मुंबई के गेट वे ऑफ इंडिया से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित एक स्थल है, जो एलीफेंटा नाम से विश्वविख्यात है। यहां पहाड़ को काटकर बनाई गई इन सुंदर और रहस्यमय गुफाओं को किसने बनाया होगा? माना जाता है कि इसे 7वीं व 8वीं शताब्दी में राष्‍ट्रकूट राजाओं द्वारा खोजा गया था। 'खोजा गया था' का मतलब यह कि यह उन्होंने बनाया नहीं था। एलीफेंटा नाम पुर्तगालियों ने दिया है। यहां हिन्दू धर्म के अनेक देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। कई हजार वर्षों पुरानी इन गुफाओं की संख्या 7 हैं जिनमें से सबसे महत्‍वपूर्ण है महेश मूर्ति गुफा। इस गुफा संकुल को यूनेस्‍को द्वारा विश्‍व विरासत का दर्जा दिया गया है। मुंबई में कई गुफाएं हैं। उनमें से एलीफेंटा, महाकाली, कन्हेरी और जोगेश्‍वरी की गुफाएं प्रसि‍द्ध हैं। इसके अलावा पुणे में पातालेश्वर या पांचालेश्वर गुफा मंदिर और लेनयाद्रि की बौद्ध गुफाएं देखने लायक हैं।

7.बादामी गुफा (कर्नाटक)
यह सुंदर और नक्काशीदार गुफा कर्नाटक के बादामी में स्थित है। बादामी की 4 गुफाओं में से 2 गुफाएं भगवान विष्णु, 1 भगवान शिव और 1 जैन धर्म से संबंधित बताई जाती हैं। पहाड़ों को काटकर लाल पत्थर से बनाई गई ये गुफाएं अपनी सुंदरता के लिए फेमस हैं। पत्थरों में की गई नक्काशी देखने लायक है। बादामी चालुक्‍यों की राजधानी थी, जो 6-8वीं सदी ईसवी में इस स्‍थान से शासन करते थे। इसे मूलत: वातापी कहा जाता है। 1979 में बादामी में और इसके आसपास खोजी गई गुफाओं, मूर्तियों, अभिलेखों, बिखरे पड़े पुरातत्‍वीय अंशों का संग्रह और परिरक्षण करने के लिए एक मूर्तिशाला के रूप में स्‍थापित किया गया था। बाद में इसे वर्ष 1982 में एक पूर्णरूपेण स्‍थल संग्रहालय के रूप में परिवर्तित कर दिया गया।

8. वराह गुफाएं (महाबलीपुरम, तमिलनाडु)
तमिलनाडु में चेन्नई के कोरोमंडल के पास महाबलीपुरम में स्थित है वराह गुफा। वराह गुफा में भगवान विष्णु का मंदिर है। चट्टानों को काटकर की गई कलाकारी इतनी सुंदर है कि इसे यूनेस्को की विश्व विरासत का हिस्सा बनाया गया है। वराह गुफा पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इस गुफा के अलावा सित्तनवसल और नार्थमलाई गुफा भी काफी फेमस है।

9. बोरा गुफाएं (आंध्रप्रदेश)
दक्षिणी राज्य आंध्रप्रदेश में बेलम व बोरा गुफाएं प्रसिद्ध हैं। बोरा गुफाएं विशाखापट्टनम से 90 किलोमीटर की दूरी पर हैं। 10 लाख साल पुरानी इन गुफाओं पर भू-वैज्ञानिकों के शोध कहते हैं कि लाइमस्टोन की ये स्टैलक्टाइट व स्टैलग्माइट गुफाएं गोस्थनी नदी के प्रवाह का परिणाम हैं। गुफाएं अंदर से काफी विराट हैं। विशाखापट्टनम में रुककर भी दिन में गुफाएं देखी जा सकती हैं। इन गुफाओं में प्राचीनकालीन शिवलिंग की पूजा आज भी आदिवासी लोग करते हैं। आंध्र के कुरनूल से 106 किलोमीटर दूर बेलम गुफाएं स्थित हैं। मेघालय की गुफाओं के बाद ये भारतीय उपमहाद्वीप की दूसरी सबसे बड़ी प्राकृतिक गुफाएं हैं। आंध्र प्रदेश के पूर्व-मध्य में कृष्णा नदी के तट पर स्थित विजयवाड़ा में भी कई गुफाएं हैं। उनमें से उंद्रावल्ली की प्रमुख गुफा है, जो सातवीं सदी में बनाई गई थी। शयन करते विष्णु की एक शिला से निर्मित मूर्ति यहां की कला का श्रेष्ठ नमूना है।


10.परशुराम महादेव गुफा मंदिर
अरावली की प्राचीन पहाड़ियों में स्थित एक गुफा मंदिर है जिसे महादेव गुफा मंदिर कहा जाता है। माना जाता है कि इसका निर्माण विष्णु के 6ठे अवतार स्वयं परशुराम ने अपने फरसे से चट्टान को काटकर किया था। इस गुफा मंदिर के अंदर एक स्वयंभू शिवलिंग है। कहते हैं यहां परशुराम के घोर तपस्या की थी। इसे 'मेवाड़ के अमरनाथ' कहा जाता है। परशुराम महादेव का मंदिर राजस्थान के राजसमंद और पाली जिले की सीमा पर स्थित है। मुख्य गुफा मंदिर राजसमंद जिले में आता है जबकि कुण्ड धाम पाली जिले में आता है। पाली से इसकी दूरी करीब 100 किलोमीटर और विश्वप्रसिद्ध कुम्भलगढ़ दुर्ग से मात्र 10 किलोमीटर है।


11.भीमबैठका (जिला रायसेन, मध्यप्रदेश)
मध्यप्रदेश प्रांत के रायसेन जिले में स्थित भीमबैठका रातापानी अभयारण्य में स्थित है। यह भोपाल से 40 किलोमीटर दक्षिण में है। इसे वैसे तो एक पुरापाषाणिक आवासीय पुरास्थल माना जाता है लेकिन कहते हैं कि यहां महाभारत काल में ध्यान और तप भी किया जाता था। यहां से आगे सतपुडा की पहाड़ियां शुरू हो जाती हैं। यह गुफा आदिमानव द्वारा बनाए गए शैलचित्रों और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है जो कि लगभग 30 हजार वर्ष पुराने हैं। यहां 750 शैलाश्रय हैं जिनमें 500 शैलाश्रय चित्रों द्वारा सज्जित हैं। भीमबेटका क्षेत्र को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भोपाल मंडल ने अगस्त 1990 में राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल घोषित किया। इसके बाद जुलाई 2003 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया है। ये भारत में मानव जीवन के प्राचीनतम चिह्न हैं। इनकी खोज वर्ष 1957-1958 में डॉक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर द्वारा की गई थी।


13.अर्जन गुफा
कुल्लू से 5 किलोमीटर की दूरी पर जगतसुख स्थान है। जगतसुख कुल्लू के राजा जगत सिंह की राजधानी थी। इस स्थान पर बिम्बकेश्वर और गायत्री देवी के मंदिर विशेष आकर्षक हैं। इसके नजदीक हमटा नाम स्थान है। यहां प्रसिद्ध अर्जुन गुफा है। इस गुफा में अर्जुन की विशाल प्रतिमा है। यहां से 2 किलामीटर दूर त्रिवेणी नामक स्थान है,जहां व्यास गंगा, धोमाया गंगा और सोमाया गंगा का संगम है। इससे 1 किलोमीटर की दूरी पर गर्म पानी का चश्मा कलात कुंड है और कपिल मुनि का आश्रम भी यहां है। यहीं पर टोबा नामक प्रसिद्ध गुफा मठ भी है।

14.उदयगिरि की गुफाएं (मध्यप्रदेश)-
उदयगिरि मध्यप्रदेश के विदिशा से वैसनगर होते हुए पहुंचा जा सकता है। नदी से यह पहाड़ी लगभग 1 मील की दूरी पर है। यह प्राचीन स्थल भिलसा से चार मील दूर बेतवा तथा बेश नदियों के बीच स्थित है। पहाड़ी के पूरब की तरफ पत्थरों को काटकर अद्भुत गुफाएं बनाई गई हैं। उदयगिरि को पहले नीचैगिरि के नाम से जाना जाता था। कालिदास ने भी इसे इसी नाम से संबोधित किया है। 10 वीं शताब्दी में जब विदिशा धार के परमारों के हाथ में आ गया, तो राजा भोज के पौत्र उदयादित्य ने अपने नाम से इस स्थान का नाम उदयगिरि रख दिया। उदयगिरि में कुल 20 गुफाएं हैं। इनमें से कुछ गुफाएं 4वीं-5वीं सदी से संबद्ध है। गुफा संख्या 1 तथा 20 को जैन गुफा माना जाता है। बाकी शिव गुफा, वराह गुफा, वैष्णव गुफा आदि गुफाओं के नाम से विख्‍यात है। इन गुफाओं का संवरक्षण करना जरूरी है।

15. उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएं (ओडीशा)-
उदयगिरि और खंडगिरि ओडीशा में भुवनेश्वर के पास स्थित दो पहाड़ियां हैं। इन पहाड़ियों में आंशिक रूप से प्राकृतिक व आंशिक रूप से कृत्रिम गुफाएं हैं जो पुरातात्विक, ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व की हैं। भुवनेश्वर से 8 किमी दूर स्थित इन दो पहाड़ियों का वातावरण काफी निर्मल है। उदयगिरि और खंडगिरि में कभी प्रसिद्ध जैन मठ हुआ करते थे। इन मठों को पहाड़ी की चोटी पर चट्टानों को काट कर बनाया गया था। उदयगिरि में जहां 18 गुफाएं हैं, वहीं खंडगिरि में 15 गुफाएं हैं।