नई दिल्लीः कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में रतलाम से बीजेपी सांसद गुमान सिंह डामोर के मोहम्मद अली जिन्ना की तारीफ वाले बयान को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी का ‘जिन्ना प्रेम’ एक बार फिर सामने आ गया है तथा अब इसका नाम ‘भारतीय जिन्ना पार्टी’ कर दिया जाना चाहिए. रतलाम से उम्मीदवार डामोर के समर्थन में प्रधानमंत्री मोदी के प्रचार करने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि डामोर के बयान के लिए प्रधानमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को माफी मांगनी चाहिए.

खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘नरेंद्र मोदी आज गुमान सिंह डामोर का प्रचार करने रतलाम गए. जो लोग एएमयू में जिन्ना की फोटो पर बवाल खड़ा करते थे, वह आज एक ऐसे व्यक्ति का प्रचार करने गए जिसने जिन्ना की तारीफ की. डामोर ने दो दिन पहले बीजेपी और आरएसएस की सोच से पर्दा हटा दिया.’’ 
उन्होंने कहा, ‘‘डामोर ने कहा कि काश, जिन्ना देश के पहले प्रधानमंत्री बनते. दो बातें हो सकती हैं. या तो ये लोग नेहरू से नफरत में इतने अंधे हो जाते हैं कि जिन्ना से मोहब्बत कर बैठते हैं या फिर जिन्ना की मोहब्बत में इतने अंधे हो जाते हैं कि नेहरू से नफरत कर बैठते हैं.’’

खेड़ा ने कहा, ‘‘वैसे, यह कोई नयी बात नहीं है. इतिहास में कुछ ऐसी चीजें है जो इनकी व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के लोग नहीं बदल सकते. ये वही लोग हैं जिन्होंने आजादी से पहले फजलुल हक की मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सरकार बनाई थी. पाकिस्तान के पक्ष में सबसे पहले सिंध असेंबली ने प्रस्ताव पारित किया, लेकिन हिंदू महासभा सरकार से अलग नहीं हुई. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंगाल में मुस्लिम लीग के साथ सरकार में वित्त मंत्री बने रहे. सावरकर ने सबसे पहले दो राष्ट्र की बात की.’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘ अब मोदी जी, आप जिन्ना समर्थक उम्मीदवार का प्रचार कर रहे हैं. अब समझ आ रहा है कि इमरान खान इन्हें क्यों जिताना चाहते हैं. अब बीजेपी का नाम बदल दिया जाता है. यह ‘भारतीय जिन्ना पार्टी’ है.’’ खेड़ा ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री, अमित शाह और ब्लॉग मिनिस्टर (जेटली) इस पर बोलते नहीं हैं. उम्मीद है कि कम से कम इस उम्मीदवार को वह बदलेंगे.’’ उन्होंने यह भी कहा कि डामोर के बयान के लिए प्रधानमंत्री और अमित शाह को माफी मांगनी चाहिए.

खबरों के मुताबिक, डामोर ने पिछले दिनों एक सभा में कथित तौर पर कहा था ‘‘आजादी के समय अगर नेहरू जिद ना करते तो देश के दो टुकड़े नहीं होते. मोहम्मद अली जिन्ना, एक अधिवक्ता और एक विद्वान व्यक्ति थे. अगर उस वक्त फैसला लिया गया होता कि हमारे पीएम मोहम्मद अली जिन्ना बनेंगे, तो इस देश के टुकड़े नहीं होते.’’