वॉशिंगटन: अमेरिका के एक शीर्ष थिंक-टैंक ने कहा है कि भारत की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत’ सार्वभौम स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि यह ठोस तरीके से काम करे और भारतीयों को अच्छी गुणवत्ता वाली देखभाल मुहैया कराए. 

वॉशिंगटन डीसी स्थित सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट (सीजीडी) नाम के थिंक-टैंक के शोधकर्ताओं ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम-जय) के प्रथम वर्ष के विश्लेषण के आधार पर कहा कि कुल मिलाकर प्रयास सकारात्मक रहा है. हालांकि, उन्होंने लागत और गुणवत्ता से संबंधित कुछ चुनौतियां भी गिनाईं और कहा कि अगर इनसे नहीं निपटा गया तो इससे योजना की प्रगति पटरी से उतर सकती है. 

 

सीजीडी की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) और अध्ययन के लेखकों में शामिल अमांडा ग्लासमैन ने पीटीआई को बताया, ‘‘मोदीकेयर (आयुष्मान भारत योजना) के कारण करोड़ों लोग स्वास्थ्य देखभाल का लाभ ले रहे हैं, जिससे सरकार द्वारा वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा ले रहे लोगों की संख्या में इजाफा हुआ है और शुरुआती अनुमानों से यह संख्या कहीं ज्यादा है.’’ 

रिपोर्ट जारी होने से पहले ग्लासमैन ने कहा, ‘‘हमने पाया कि 50 करोड़ से ज्यादा लोग अब ‘मोदीकेयर’ की कवरेज या सरकार प्रायोजित कार्यक्रम के लिए पात्र हैं. यह काफी शानदार संख्या है, लेकिन लागत को कम करने और गुणवत्ता में सुधार करने के लिए अभी काफी कुछ करना बाकी है.’’