भोपाल । एक मामले में उपभोक्ता फोरम द्वारा सुनवाई करते हुए कहा कि अकसर कंपनियां विज्ञापन और ब्रोशर्स में ग्राहकों को लुभाने वाली बाते बड़े-बड़े अक्षरों में लिखती हैं, जबकि नियम व शर्तों को इतना छोटा लिखते हैं कि कोई पढ़ भी नहीं पाता है। यह सीधे तौर ग्राहकों को ठगने का तरीका है। यह टिप्पणी जिला उपभोक्ता फोरम ने 70 चैनल लाइफ टाइम फ्री दिखाने वाले लुभावने विज्ञापन के दावे को पूरा नहीं करने को लेकर डिश टीवी इंडिया के खिलाफ एक याचिका की सुनवाई के दौरान की है। फोरम के अध्यक्ष न्यायाधीश आरके भावे, सदस्य सुनील श्रीवास्तव व क्षमा चौरे की बेंच ने डिशटीवी टीवी इंडिया प्रालि., एमपी नगर और डिश सिस्टम के विक्रेता को आदेश दिए हैं कि दो महीने के अंदर उपभोक्ता द्वारा खरीदे गए सिस्टम की कीमत 2800 रुपए के अलावा 13 हजार रुपए की राशि बतौर हर्जाना दिया जाए। एकतापुरी निवासी जेपी गोयल की ओर से डिश टीवी इंडिया लिमिटेड और वैभवलक्ष्मी इंटरप्राइजेज, न्यू अशोका गार्डन के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में याचिका दायर की गई थी। इसमें शिकायत की गई थी कि डिश टीवी ने अपने ब्रोशर और विज्ञापन जारी किए गए थे। इसमें बताया गया कि डिशटीवी कनेक्शन खरीदने पर उपभोक्ता को 70 चैनल लाइफ टाइम फ्री देखने को मिलेंगे, उसके लिए रिचार्ज कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
     लुभावने विज्ञापन के झांसे में आकर उन्होंने 2013 में डिश टीवी को 2800 रुपए देकर कनेक्शन लिया था। डिश टीवी सिस्टम को पहली बार अनावेदक ने ही रिचार्ज करके आवेदक को दिया था, जिसकी अंतिम तिथि 24 अगस्त 2013 थी, उस दिन डिश टीवी सिस्टम बंद हो गया। शिकायत करने पर कहा गया कि 280 रुपए का मासिक रिचार्ज कराने पर सिस्टम चालू होगा। जबकि कंपनी के ब्रोशर और विज्ञापन में 70 चैनल लाइफ टाइम फ्री देखने का बताया गया था। इस मामले में डिश टीवी की ओर से कंपनी ने तर्क दिया कि उपभोक्ता ने डिश टीवी इंडिया से अनुबंध के तहत खरीदा था, जिसकी कुछ नियम और शर्तें थी जिनका पालन उपभोक्ता ने नही किया। उपभोक्ता ने 70 चैनल फ्री देखने के लिए जरूरी आवेदन नहीं दिया, लेकिन फोरम ने कंपनी के तर्क को खारिज कर दिया था। न्यायाधीशों की बेंच ने डिशटीवी टीवी इंडिया प्रालि., एमपी नगर और डिश सिस्टम के विक्रेता को आदेश दिए हैं कि दो महीने के अंदर उपभोक्ता द्वारा खरीदे गए सिस्टम की कीमत 2800 रुपए के अलावा 13 हजार रुपए की राशि बतौर हर्जाना दिया जाए।