नई दिल्ली, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने लोकसभा चुनाव के लिए जब घोषणापत्र का ऐलान किया था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ना सिर्फ अगले 5 साल के लिए पार्टी के लक्ष्य को बताया था, असल में उन्होंने 2047 तक के लिए पार्टी की योजनाओं को बताया था. इसमें कोई हैरान वाली बात भी नहीं है, क्योंकि पीएम मोदी देश के भविष्य को लेकर अक्सर अपनी योजनाओं की बात करते रहते हैं. 2014 स्वतंत्रता दिवस के दौरान जब स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत हुई थी तो पीएम मोदी ने भारत को खुले में शौच मुक्त का लक्ष्य 2019 रखा था. अपने कार्यकाल के तीसरे साल में उन्होंने 2022 तक नए भारत की बात की थी. हाल ही में उन्होंने 2047 के लिए लक्ष्य रखा है. बता दें इस साल देश को आजाद हुए 100 साल हो जाएंगे.

2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई थी तो उसने भारत के आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करने के लिए कई योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया. अब जब मोदी सरकार के मंत्री अपने पिछले 5 साल में किए कामकाज के आधार पर अपनी दूसरी पारी की राह देख रहे हैं तो ऐसे में हम आपको बताते हैं कि 2014 से 2019 के बीच पीएम मोदी के मंत्रियों का प्रदर्शन कैसा रहा.

विदेश मंत्रालय

साल 2014 में बीजेपी ने विदेश नीति को ठीक करने का वादा किया था. चीन और पाकिस्तान से खतरा होने के बावजूद विदेश नीति को मजबूत करना मोदी सरकार की बड़ी उपल्ब्धि रही. पीएम मोदी ने पिछले 5 साल में 93 देशों का दौरा किया. इस दौरान सऊदी अरब के साथ संबंध भी सुधरे.हालांकि सार्क अभी भी चुनौती बना हुआ है. जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने पर चीन अड़ंगा लगा रहा है.

शिक्षा

इसकी शुरुआत स्मृति ईरानी के विवादास्पद कार्यकाल से हुई और फिर बाद में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को खारिज कर दिया. मोदी सरकार ने शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए शिक्षा मंत्रालय में एक चीज पर काम किया. इसे हासिल करने के लिए, मोदी सरकार का पहला कदम था बच्चों के लिए राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण-जो यह साबित करता है कि नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने कैसे अस्सिटेंट लर्निंग मानकों को अंजाम दिया. इसके कारण शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 में संशोधन करके कक्षा-और-विषयवार सीखने के परिणामों को शामिल किया गया.

गृह मंत्रालय

जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद आज भी गृह मंत्रालय के लिए एक चुनौती बना हुआ है. 2016 के बाद हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है. 2018 में जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद से जुड़ी 614 घटनाएं दर्ज हुईं. जबकि 2017 में ये 342 थी. इतना ही नहीं 2008 के बाद ये सबसे ज्यादा रही. युवाओं के आतंकी संगठनों से जुड़ने के जो आंकड़े है वो भी चिंताजनक है. 2018 में 190 से ज्यादा युवा आतंकी संगठन में शामिल हुए.

इंफ्रास्ट्रक्चर

मोदी सरकार ने देश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए काम तो किया है, लेकिन रेलवे और टेलिकॉम के क्षेत्र में आज भी बहुत सारे काम किया जाना है. सरकार दावा करती है कि यूपीए के शासन में 11.3 किलोमीटर की तुलना में पिछले दो वर्षों में एक दिन में 34 किमी सड़क का निर्माण हुआ. बिजली को लेकर सरकार का दावा है कि उसने भारत के गांवों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण किया है. कई स्वतंत्र रिपोर्टों ने दावों पर सवाल उठाए हैं.

दूसरी ओर, रेलवे में, मोदी सरकार ने 8.56 लाख करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा की थी, लेकिन केवल आधा लक्ष्य ही हासिल किया जा सका है.

रक्षा

14 फरवरी के पुलवामा आतंकी हमले से पहले, मोदी सरकार नौकरियों की कमी, नोटबंदी, विवादास्पद राफेल सौदा और कृषि संकट पर विपक्ष के हमलों का बचाव कर रही थी. पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंपों पर एयरस्ट्राइक के बाद देश का ध्यान अर्थव्यवस्था से राष्ट्रीय सुरक्षा की ओर चला गया.

पर्यटन

केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) केजे अल्फोंस का दावा है कि पर्यटन ने पिछले चार सालों में 1.3 करोड़ नौकरियां पैदा की हैं. वर्ल्ड ट्रेवल और टूरिज्म काउंसिल की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक पर्यटन ने भारत की जीडीपी में नौ प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया और देश के रोजगार का आठ प्रतिशत प्रदान किया. ये आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान करने के लिए काफी बड़े हैं, लेकिन यहां विडंबना यह है कि रैंकिंग में ऊपर आने के बावजूद, एशिया-प्रशांत क्षेत्र के पांच प्रतिशत से कम विदेशी पर्यटक भारत आते हैं.

2019-20 के केंद्रीय बजट में पर्यटन के विकास के लिए 2,189 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया जो कि 27.8 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट का केवल 0.08 प्रतिशत है.

अर्थव्यवस्था

2014 में, नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था को एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बनाया था. उन्होंने मूल्य वृद्धि, नौकरियों, भ्रष्टाचार और कालेधन पर तत्कालीन यूपीए सरकार पर भी हमला किया था. दूसरे कार्यकाल के लिए बीजेपी का 'संकल्प पत्र 2019' कृषि संकट और नौकरियों जैसे आर्थिक मुद्दों को संबोधित करता है और यह भी कहता है कि रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.

पिछले पांच वर्षों में, भले ही भारत विश्व बैंक की ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में 23 स्थान ऊपर चढ़ा, लेकिन भारतीय व्यापार अभी भी लालफीताशाही में घिरता नजर आ रहा है. ये बात मेक इन इंडिया पहल के लिए भी है, जो 2014 में भारत में और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए शुरू किया गया था. हालांकि, मेक इन इंडिया ने उड़ान नहीं भरी है. इसका एक कारण निजी क्षेत्र के निवेश में मंदी भी हो सकती है.

शहरी विकास

इसके लिए सरकार ने 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत की थी. हालांकि, सरकार ने दावा किया है कि वह जल्द ही अन्य कार्यक्रमों की तरह "प्रभावशाली" संख्याओं को भी खोलेगी.  

ग्रामीण विकास

दूसरे कार्यकाल के लिए बीजेपी ने ग्रामीण विकास में 25 लाख करोड़ रुपये आवंटित करने का वादा किया है. सरकार ने 2015 में 2022 तक 2.95 करोड़ ग्रामीण घर और 1.2 करोड़ शहरी घरों के निर्माण का वादा किया था. जबकि सरकार ने 1.43 करोड़ ग्रामीण घरों का निर्माण करने का दावा किया है. वास्तविकता केवल 60 प्रतिशत लाभार्थियों को उनकी अंतिम किस्त प्राप्त हुई है.

कृषि

नरेंद्र मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था. सरकार के वादे के बावजूद, 2014 से 2019 तक औसतन 2.9 प्रतिशत की कृषि विकास दर, यूपीए शासन की तुलना में एनडीए शासन में बहुत कम रही. यह सेक्टर 2014 और 2016 के बीच सूखे की मार भी झेली. 

स्वास्थ्य

सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य 10 करोड़ से अधिक परिवारों को स्वास्थ्य में 5 लाख रुपये की मदद करना था. राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण का कहना है कि सितंबर 2018 में इस योजना के लॉन्च के बाद 7 लाख लोगों को ही इलाज मिला. 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में केंद्र का योगदान भी 2014-15 के 60 प्रतिशत से घटकर 2019-20 के अंतरिम बजट में 50 प्रतिशत हो गया. सरकार का उद्देश्य 150,000 कल्याण केंद्रों का निर्माण भी था. इस साल बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 31,745 करोड़ रुपये रखा गया है. फंड की कमी के कारण लक्ष्य पूरा होने की संभावना नहीं है.