नई दिल्ली । रियल सेक्टर की कंपनी आम्रपाली ग्रुप के मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त फरेंसिक ऑडिटरों ने कोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य का खुलासा किया है। ऑडिटरों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि आम्रपाली ग्रुप ने बायर्स से मिले फ्लैट की कीमत में से 30 प्रतिशत तक मार्केटिंग एजेंटों को चुकाया था। इसके अलावा, ग्रुप के प्रमोटरों और डायरेक्टरों ने होम-बायर्स से मिले पैसों को निजी हितों के लिए डायवर्ट किया। कोर्ट में पेश किए गए विस्तृत रिपोर्ट में ऑडिटरों (पवन कुमार अग्रवाल और रवि भाटिया) ने बताया कि होम-बायर्स के 25 करोड़ से ज्यादा रुपयों को कंपनी के शीर्ष अधिकारियों ने एलआईसी, म्युचुअल फंड और शेयरों में निवेश किया। रिपोर्ट में बताया गया है कि आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा ने हाल के वर्षों में अपने तमाम परिजनों को करीब 11 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए थे। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने ही ऑडिटरों को नियुक्त कर आम्रपाली ग्रुप की 46 रजिस्टर्ड कंपनियों और अन्य मुखौटा कंपनियों के फरेंसिक ऑडिट का आदेश दिया था।
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की बेंच के सामने पेश हुए पवन कुमार अग्रवाल ने कहा कि कई अन्य 'बहुत महत्वपूर्ण लोगों' को भी होम-बायर्स के पैसे डायवर्ट किए गए। अग्रवाल ने कहा कि वह इन अन्य 'बहुत ही महत्वपूर्ण लोगों' की भूमिका की भी जांच कर रहे हैं लेकिन ये लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में तो फ्लैट की कीमत का 30 प्रतिशत कमिशन के तौर पर एजेंटों को दिए हैं। अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि वह अन्य लोगों की जांच के बाद एक सप्लिमेंटरी रिपोर्ट पेश करेंगे।