रायपुर। अंतागढ़ टेपकांड में एक बार फिर जांच धीमे होने से एसआइटी की भूमिका पर सवाल उठने लगा है। खासकर तब जब मुख्य गवाह फिरोज सिद्दीकी ने दावा किया है कि वह सारे सबूत दे चुके हैं, लेकिन जांच दल अभी भी कोर्ट के समक्ष उनका बयान दर्ज नहीं करा रहा है।

पुराने वाइस सैंपल पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कांग्रेस की तरफ से पुलिस को सौंपे गए वाइस सैंपल पहले ही फॉरेंसिक लैब से जांच होकर आए थे। उसकी तस्दीक के लिए पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया। रायपुर में गठित एसआइटी की यूनिट अंतागढ़ टेपकांड में लगभग चुप्पी साधे हुए है।
2015 में कांग्रेस ने करवाई थी सैंपल जांच 

कांग्रेस ने जो वाइस सैंपल अभी पुलिस को सौंपे हैं, उसकी फारेंसिक जांच पहले ही हो चुकी है। यह जांच किसी सुरक्षा एजेंसी के मार्फत नहीं, बल्कि कांग्रेस ने खुद करवाई थी। यह ऑडियो सही पाया गया था। तब एक सर्टिफिकेट कोर्ट में भी लगाया गया। अब पुलिस दोबारा नए सिरे से सबूतों की जांच का दावा कर रही है।
हकीकत जानने चाहिए ओरिजनल साउंड

कोर्ट में 164 के तहत बयान होना है, लेकिन एसआइटी इसके पहले सौंपे गए सबूतों की तस्दीकी के लिए ओरिजनल वाइस सैंपल ले सकती है। जिन पक्षकारों का नाम सामने आया है उनका ऑडियो टेप का मिलान करने के लिए उनकी आवाज चाहिए, लेकिन इस ओर अभी कोई चहलकदमी नहीं है।

वैसे अंतागढ़ टेपकांड में जिन्हें आरोपित बनाया गया है, उनकी तरफ से कोर्ट में जमानत याचिका के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जा चुका है। पांच में से तीन पक्षकारों ने आवेदन लगाया है, इसमें सुनवाई होनी है।

- टेपकांड से जुड़े मामले में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। मुख्य गवाह के द्वारा सौंपे गए सबूतों की तकनीकी जांच होनी है। कुछ और लोगों के बयान भी लिए जाएंगे। - अभिषेक माहेश्वरी, प्रभारी एसआइटी