लंदन । सेक्स की लत को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) ने एक मानसिक बीमारी बीमारी माना है। कम्पलसिव सेक्शुअल बिहेवियर यानी जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश करना जिसे सिंपल शब्दों में सेक्स एडिक्शन या सेक्स की लत भी कहा जा सकता है। वैसे लोग जो इस तरह की समस्या से पीड़ित हैं और अपना इलाज करवाना चाहते हैं उनके जीवन में डब्ल्यूएचओ का यह अहम फैसला बड़ा बदलाव ला सकता है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, सेक्स एडिक्शन निरंतर चलने वाली एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने तीव्र, बार-बार दोहराए जाने वाले सेक्सुअल उत्तेजना या बार-बार सेक्स करने की अपनी इच्छा को कंट्रोल करने में असमर्थ रहता है। डब्ल्यूएचओ ने सेक्स एडिक्शन को कैसे परिभाषित किया है इससे जुड़ी एक दिलचस्प बात यह है कि सेक्स एडिक्शन को इस बात से तय नहीं किया जाता कि किसी व्यक्ति के कितने सेक्शुअल पार्टनर्स रहे हैं या फिर वह कितना या कितनी बार सेक्स करता है बल्कि सेक्स एडिक्शन को एक ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें सेक्स की लत से पीड़ित व्यक्ति अपनी सेहत, पर्सनल केयर और दूसरी जरूरी एक्टिविटीज और जिम्मेदारियों को भी नजरअंदाज करता है। 
अगर किसी व्यक्ति में लगातार 6 महीने तक ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई पड़ते हैं और अगर कोई व्यक्ति सेक्स की वजह से अपने काम, पढ़ाई, परिवार और दोस्तों तक की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज करने लगे तो उसे सेक्स एडिक्शन की कैटिगरी में रखा जा सकता है। अभी कुछ दिनों पहले ही डब्ल्यूएचओ ने गेमिंग एडिक्शन को मानसिक बीमारी की उसी कैटिगरी में रखा था जिसमें सेक्स एडिक्शन को रखा गया है। दुनियाभर के एक्सपर्ट्स डब्ल्यूएचओ के इस कदम से बेहद खुश हैं और उनका मानना है कि सेक्स एडिक्शन को मानसिक बीमारी की कैटिगरी में रखने से इस समस्या से पीड़ित लोगों को इलाज के कई ऑप्शन्स मिल पाएंगे और इस क्षेत्र में रिसर्च भी हो पाएगी। फिलहाल कुछ ही लोग हैं जो सेक्स एडिक्शन से परेशान लोगों की मदद करना चाहते हैं लेकिन अब चूंकि इसे आधिकारिक रूप से मानसिक बीमारी मान लिया गया है तो स्थिति में जल्द बदलाव होगा।