वॉशिंगटन। एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में रहने वाले लोग जापान और स्विट्जरलैंड में रहने वाले लोगों की तुलना में जल्दी और अधिक बुढ़ापा का अनुभव करने लगते हैं। बुढ़ापे के नकरात्मक प्रभावों से भी जूझता पड़ता है। अध्ययन के मुताबिक, इन देशों में सबसे अधिक और सबसे कम उम्र के लोगों के बीच लगभग 30 साल का फासला है। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि औसतन 65 साल के किसी व्यक्ति को होने वाली उम्र संबंधी परेशानियां और जापान और स्विट्जरलैंड में रहने वाले 76 साल के किसी व्यक्ति और पापुआ न्यू गिनी में रहने वाले 46 साल के व्यक्ति को होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का स्तर समान होता है। विश्लेषण में यह भी पता चला कि भारत में रहने वाले लोगों को सेहत संबंधी यही परेशानियां 60 की उम्र तक आते-आते महसूस होने लगती हैं। अध्ययन की प्रधान लेखक और अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन में पोस्टडॉक्टोरल शोधार्थी एंजेला वाई चांग ने कहा कि ये असमान निष्कर्ष यह दिखाते हैं कि लोगों का दीर्घायु होना या तो एक अवसर की तरह हो सकता है या आबादी के समग्र कल्याण के लिये एक खतरा। यह उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं पर निर्भर करता है। चांग ने कहा, ‘उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं जल्दी सेवानिवृत्ति, कम कार्यबल और स्वास्थ्य पर अधिक खर्च का कारण बन सकती हैं। स्वास्थ्य प्रणाली की बेहतरी पर काम करने वाले सरकारी अधिकारियों और अन्य संस्थाओं को यह सोचने की जरूरत है कि लोगों पर उम्र संबंधी नकारात्मक असर कब से दिखना शुरू होता है।’भारत आयु से संबंधित बोझ दर में 159वें पायदान पर है जबकि आयु से संबंधित बीमारी बोझ दर में उसका स्थान 138वां है। आयु से संबंधित बीमारी बोझ दर में फ्रांस (76 वर्ष) तीसरे स्थान पर, सिंगापुर (76 वर्ष) चौथे स्थान पर और कुवैत (75।3 वर्ष) पांचवें स्थान पर है। वहीं 68।5 वर्ष के साथ अमेरिका 54वें स्थान पर है। अमेरिका इस सूची में ईरान (69 वर्ष) व एंटीगुआ और बारबूडा (68।4 वर्ष) के बीच है। अध्ययन में ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिजीज (जीबीडी) के अध्ययन के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है। अध्ययन में हालांकि बताया गया कि चीन और भारत जैसे देश उम्र संबंधी बीमारी रैंकिंग में बेहतर कर रहे हैं।