तीन तलाक, नागरिकता संशोधन विधेयक और मेडिकल काउंसिल संशोधन विधेयकों के राज्यसभा में लटकने के भरपूर आसार बन गए हैं। इन विधेयकों को पारित कराने को लेकर विपक्ष तैयार नहीं है। इसलिए मोटे तौर पर सरकार भी इन्हें टालने के लिए सैद्धान्तिक रूप से सहमत हो गई है, जबकि छह अन्य निर्विवाद विधेयकों को राज्यसभा में पारित कराए कराने पर विपक्ष तैयार है। उच्च पदस्थ सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अब बजट सत्र के सिर्फ तीन दिन बाकी बचे हैं। संसदीय कार्य मंत्री विजय गोयल के अनुसार, इन तीन दिनों में राज्यसभा में बहुत काम होना है। उन्होंने विपक्ष से कई दौर की बात की है और उम्मीद जताई है कि सोमवार से सदन सुचारू रूप से चलेगा। एक दिन राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव, एक दिन अंतरिम बजट तथा एक दिन विधेयकों के लिए रखा गया है। उन्होंने हिन्दुस्तान से कहा कि विपक्ष से बात हुई है। छह निर्विवाद विधेयकों को पारित कराने पर सहमति बन गई है। जिन विधेयकों के पारित होने की संभावना है, उनमें आधार एवं अन्य कानून विधेयक, आर्बिटेशन बिल, कंपनी विधेयक, पर्सनल लॉ एमेंडमेंट बिल आदि शामिल हैं। 
बता दें कि तीन तलाक और एमसीआई विधेयक अध्यादेश के बदले लाए गए हैं। इसके अलावा कंपनी संशोधन विधेयक का भी अध्यादेश है। ये विधेयक लोकसभा से दिसंबर में ही पास हो चुके हैं, लेकिन राज्यसभा में लंबित है। कंपनी विधेयक पर विवाद नहीं है, इसलिए उसके पारित होने की संभावना है। जबकि तीन तलाक और एमसीआई विधेयक लटक जाएंगे। एमसीआई संशोधन विधेयक में एमसीआई को भंग करके विशेषज्ञों की टीम द्वारा उसके संचालन किए जाने का प्रावधान है। अध्यादेश के जरिये यह कार्य चल रहा है।