रायपुर। दो दिन बाद मनाई जाने वाली मकर संक्रांति की तैयारी जोरशोर से की जा रही है। इस बार संक्रांति 14 जनवरी की रात्रि में सिंह पर सवार होकर आ रही है। चूंकि संक्रांति का पुण्य काल सूर्योदय के बाद माना जाता है इसलिए 15 जनवरी को संक्रांति मनाना फलदायी होगा। मकर संक्रांति की प्रमुख पूजा टाटीबंध स्थित भगवान अयप्पा मंदिर में होती है।

मंदिर में दर्शन करने दक्षिण भारतीय समाज के प्रदेश भर में रहने वाले हजारों श्रद्धालु पहुंचेंगे। मंदिर का प्रमुख पर्व होने के चलते तैयारी जोरशोर से शुरू हो चुकी है। मंदिर में रंगरोगन किया जा रहा है। संक्रांति की शाम को मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर गर्भगृह तक 11 हजार दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। इस मौके पर करीब 5 हजार श्रद्धालुओं के लिए भंडारे में भोजन की व्यवस्था की जाएगी।
सुबह से रात तक भक्तिमय माहौल

श्री अयप्पा सेवा संघ के अध्यक्ष विनोद पिल्लई एवं सचिव एमएन सुकुमारन ने बताया कि सुबह 4.30 बजे से अभिषेक, गणपति पूजा के पश्चात भक्तगण पवित्र सीढ़ियों का आरोहण करेंगे। शाम 6.30 बजे दीप आराधना, आरती के बाद भोग पूजा, भजन-कीर्तन का दौर चलेगा।
शबरीमाला आकाश में दिखती है ज्योति

ऐसी मान्यता है कि केरल के शबरीमाला स्थित प्रमुख मंदिर में शाम के बाद आकाश में भगवान के चमत्कार से मकर ज्योति चमकती दिखाई देती है। इस ज्योति के दर्शन करने देश भर से हजारों भक्त उमड़ते हैं। टाटीबंध के मंदिर में भक्तगण स्वयं ज्योति प्रज्ज्वलित करने जुटते हैं। आकर्षक रंगोली सजाकर 11 हजार से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं।
संक्रांति का उपवाहन हाथी

ज्योतिषी डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार साल 2019 में मकर संक्रांति सिंह पर सवार होकर आ रही है, संक्रांति का उप वाहन हाथी है। इस बार सूर्य 14 जनवरी की शाम 7 बजकर 53 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर रहा है और उदयाचल यानी सूर्योदय का वक्त 15 जनवरी को है, इसलिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाना श्रेष्ठ और फलदायी होगा।
ध्वंक्षी मकर संक्रांति में अमृत सिद्धि योग

इस साल की मकर संक्रांति का नाम ध्वंक्षी है। पौष मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि सोमवार को रेवती नक्षत्र में संक्रांति मनाई जाएगी। इस दिन अमृत सिद्धि योग है। इस योग में दान-पुण्य करने से कई गुना फल की प्राप्ति होती है।
स्नान-दान 15 को पुण्यकाल

जिस रात्रि में सूर्य, मकर राशि में प्रवेश करता है उसके अगले दिन को पुण्य काल माना जाता है। इस बार सूर्य 14 जनवरी की शाम के बाद मकर राशि में प्रवेश कर रहा है, इसलिए 15 जनवरी को सुबह पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद तिल, गुड़ का दान किया जाएगा।