भोपाल। मध्यप्रदेश की पूर्ववर्ती शिवराज सरकार को पिछले तीन वर्ष में 5625.52 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में निवेश के कारण यह नुकसान हुआ। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की विधानसभा में पेश रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार रेत खदानों की नीलामी और रॉयल्टी में गड़बड़ी, जलकर बकाया, आबकारी नीति में कमी, जांच में लापरवाही से करों के कम निर्धारण कर अफसरों ने सरकार को करोड़ों का नुकसान कराया। विधानसभा में पेश की गई इस कैग की रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 की स्थिति में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी सबसे ज्यादा 2766 करोड़ रुपए के घाटे में है। पूर्व और पश्चिम क्षेत्र की कंपनियां भी एक हजार करोड़ से ज्यादा के नुकसान में हैं। 
 
मुख्यमंत्री को तत्काल वित्त मंत्री जी की अध्यक्षता में मंत्री मण्डलीय समिति बना कर दोषी लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
- दिग्विजय सिंह, कांग्रेस नेेता
 

कैग की रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है, जो भी दोषी पाया जायेगा उनपर कार्रवाई तय है। 
-कमल नाथ, मुख्यमंत्री


बालाघाट में बड़ा खेल किया गया
बालाघाट और उज्जैन जिले की 31 खदानों की नीलामी में कलेक्टरों द्वारा रेत का अनुमान लगाए जाने के कारण 3.37 करोड़ रुपए कम राजस्व मिला।  नौ जिलों में 48 ठेकेदारों से अनुबंध राशि 1.38 करोड़ रुपए कम और 2.35 करोड़ रुपए कम ब्याज की प्राप्ति हुई। 18 जल खनन कार्यालयों में 58 पट्टेदारों और 11 ठेकेदारों से 60.5 करोड़ रुपए कम रॉयल्टी वसूली गई। खनन निगम ने शासन को 136.69 करोड़ रुपए की रॉयल्टी नहीं दी, क्योंकि लीज अनुबंध में पूरी राशि जमा करना निर्धारित नहीं था। रॉयल्टी की निगरानी ठीक नहीं होने से 20 लाइसेंस धारकों से 8.11 करोड़ रुपए कम मिले और 42 लाइसेंस धारकों ने 8.12 करोड़ रुपए की रॉयल्टी का भुगतान ही नहीं हुआ।  देर से किराया या रॉयल्टी देने वाले 153 पट्टेदारों से ब्याज वसूलने में विफलता के कारण 13.91 करोड़ रुपए कम मिले। जिला कलेक्टर 218 पट्टेदारों से 2.92 करोड़ रुपए वसूलने में असफल रहे। इसी तरह विभाग 13 ठेकेदारों से 1.61 करोड़ रुपए नहीं वसूल पाया। 
 
जल संसाधन में मनमानी 
कैग ने जांच में पाया कि जल संसाधन विभाग ने उद्योगों, घरेलू कनेक्शन और किसानों से 1627.54 करोड़ रुपए का बकाया नहीं वसूला। इसमें उद्योगों पर 506.34 करोड़ रुपए बकाया था। एक अन्य खास बात यह सामने आई कि अनूपपुर में ओरिएंट पेपर मिल, अमलाई पर जून 1998 से मार्च 2018 तक वसूली के लिए 771.06 करोड़ रुपए बकाया था।  इस संबंध में उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका भी खारिज कर दी, इसके बावजूद यह राशि नहीं वसूली गई। अलग-अलग अनाजों से शराब उत्पादन के मानदंड निर्धारित नहीं होने या निम्न मानदंड होने से सरकार को 1192.12 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।  

शराब ठेकेदारों से की मिलीभगत
देशी शराब के ठेकों में केवल प्रदेश के डिस्टलरी वालों को भाग लेने की अनुमति देने से प्रतिस्पर्धा कम हुई और उन्होंने सिंडीकेट बना लिया। इससे उनको 653.08 करोड़ रुपए का अनुचित लाभ पहुंचा। शराब परिवहन के शुल्क निर्धारण में गड़बड़ी के कारण एक वर्ग को अनुचित फायदा पहुंचा और सरकार को 100.62 करोड़ रुपए की हानि हुई। 
 
जांच में चूक से वैट का नुकसान 
अधिकारियों ने बिल्डरों और ठेकेदारों के खातों, खरीदी, टीडीएस आदि की जांच की, लेकिन इसमें उनसे चूक हुई। चूक के कारण 125 प्रकरणों में टर्नओवर 872.97 करोड़ रुपए कम निर्धारित हुआ। इससे वैट 226.13 करोड़ रुपए कम लगा। ठेकेदारों और उप ठेकेदारों के बीच टीडीएस संबंधी गफलत के कारण 171.82 करोड़ रुपए के टर्नओवर की जानकारी सम्मिलित नहीं की जा सकी, जिससे टैक्स 20.6 करोड़ रुपए कम लगाया गया। 
 
सख्त दिखे कमलनाथ
नए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि विधानसभा के पटल पर रखी गयी कैग की रिपोर्ट में जिस तरह से पिछली सरकार के कार्यकाल में वित्तीय अनियमित्ताओं व वित्तीय प्रबंधन की कमज़ोरियां उजागर हुई हैं। करोड़ों रुपये के नुक़सान की बात सामने आई है। उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि किस तरह का एक गठजोड़ पिछली सरकार में कार्य कर रहा था। भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा था। हम सारे मामलों की विस्तृत जांच करवाएंगे। सरकारी खज़़ाने को नुक़सान पहुंचाने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।