भोपाल । राजधानी के हिन्दी भवन में चल रहे पांच दिवसीय पुस्तक उत्सव में आज चौथे दिन गप्प प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें राजधानी के एक दर्जन से अधिक गप्प हाकने वाले और गप्प की कविता और हास्य कविता से हिन्दी भवन का सभागार मंत्र मुग्द हो गया और खूब गप्पबाजों ने तालियाँ बटोरी। आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि और साहित्यकार श्री धूमकेतु विशेष अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी श्री धर्मेन्द्र शर्मा हास्य कवि श्री ओ.पी. दुबे एवं राममोहन चौकसे, महेश सक्सेना की उपस्थिति में गप्प बाजों ने अपनी लंबी-लंबी गप्पे हाकी। किसी ने कहा कि बड़े तालाब का ढंक्कन बन रहा है तालाब में प्रदूषण फैल रहा है, अब लगेगा तालाब के ऊपर ढक्कन। वरिष्ठ कवि श्री ओ.पी. दुबे ने अपनी हास्य कविता मुझे तुमसे प्यास हुआ दीदार के बगैर जैसे छत कोई डाल दे दीवार के बगैर........... श्री दुबे ने भोपाल अंदाज में सुनाया की जब गैस राहत के पैसे लिए सर्वे करने कोई घर पहुँचता है और बाहर आवाज लगाता है कोई है तो अंदर से आवाज आती है अम्मी जान कहती है यहाँ कोई नहीं है। जब वो कहता है कि गैस राहत के पैसे बटना है तो अम्मी जान अंदर बुलाती है और सर्वे करने वाला कहता है कमाल की अम्मा हो तो वह गुस्से में लाल होकर कहती है कलाम की नहीं मैं जमाल की बीबी हूं।   
कार्यक्रम में राममोहन चौकसे ने लोमड़ी का पीछा करते-करते हमारा पेंट खराब हुआ की गप्प सुनाई और गप्प के बारे में बताया गप्प तर्क शक्ति और कल्पना शक्ति है। वहीं सुनील दुबे ने स्वतंत्रता के आंदोलन में भाग लेने का वाक्या सुना और श्रोताओं को खूब हंसाया। धनवंत्री द्विवेदी ने मम्मी घर पर नहीं है तुम आ जाओं..........कविता पाठ किया। राजकुमारी चौकसे विनीता प्रजापति रेखा भटनागर, करन राजपूत, लखन सिंह ने अपनी कविताओं के माध्यम से गप्प सुनाई। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और यह पुस्तक उत्सव वास्तव में राजधानीवासियों के साहित्यकार कवि, पाठक, लेखक सभी को जोड़कर रखता है। इस अवसर पर नई रोशनी की महिलाओं को एवं गप्पबाजों का मंच से स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कादम्बिनी शिक्षा समिति के अध्यक्ष दिनेश शर्मा, चन्द्रहास्य शुक्ल, विक्रम श्रीवास्तव, देवेन्द्र थापक, श्वेता श्रीवास्तव, कादम्बिनी शर्मा, रूकसाना खान, साधना श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।