फ़िल्म आशिकी से रातों-रात स्टार बन पूर्व अभिनेत्री अनु अग्रवाल अब 50 साल की हो गयी हैं। अनु को समय ने भुला दिया है लेकिन उनकी ज़िंदगी में एक दौर ऐसा भी आया था जब वो महेश भट्ट की फ़िल्म आशिकी से बेहद लोकप्रिय हो गयीं थीं। अनु के लिए शोहरत की बुलंदी से गुमनामी तक का उनका सफर बेहद ही दर्दनाक रहा है लेकिन, समय से उनकी लड़ाई हर किसी को प्रेरित करती हैं और खुद को संभाल लेने के लिए उनकी मिसाल दी जाती है। कहते हैं, 1990 में आई फ़िल्म ‘आशिकी’ ने लोगों को प्यार करने का एक नया अंदाज़ सिखाया था। आज भी उस फ़िल्म के गीत चाहे वो ‘मैं दुनिया भुला दूंगा तेरी चाहत में’ हो या ‘धीरे-धीरे से मेरी ज़िंदगी में आना’ इन्हें सुनते ही हम यादों में चले जाते हैं। इन गीतों से घर-घर में पहचाने बनाने वाली अभिनेत्री अनु आज बॉलवुड से दूर रहकर योग सिखाती हैं। 
 महेश भट्ट ने उन्हें अपनी आने वाली म्यूजिकल फ़िल्म ‘आशिकी’ में पहला ब्रेक दिया। यह फ़िल्म ज़बरदस्त हिट साबित हुई और सिर्फ 21 साल की उम्र में एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने वाली अनु ने पहली ही फ़िल्म से अपनी मासूमियत, संजीदगी और बहेतरीन अदाकारी से लोगों को अपना मुरीद बना लिया लेकिन, आशिकी से मिले स्टारडम को वो बहुत दिनों तक कायम नहीं रख सकीं और उसके बाद उनकी एक के बाद एक फ़िल्में जैसे ‘गजब तमाशा’, ‘खलनायिका’, ‘किंग अंकल’, ‘कन्यादान’ और ‘रिटर्न टू ज्वेल थीफ़’ बुरी तरह फ्लॉप हुईं! इस बीच उन्होंने एक तमिल फ़िल्म ‘थिरुदा-थिरुदा’ में भी काम किया। यहां तक अनु ने एक शॉर्ट फ़िल्म ‘द क्लाऊड डोर’ भी की लेकिन उन्हें नाकामी ही मिली। 
अब अनु को जैसे इसका अहसास हो गया था कि वो फ़िल्मों के लिए नहीं बनी है और इसलिए कुछ समय बाद अनु ने अपने आपको बॉलीवुड से अलग कर अपना रुख योग और अध्यात्म की तरफ़ कर लिया। अनु के जीवन में बड़ा हादसा  तब हुआ जब वो 1999 में दुर्घटना का शिकार हो गयीं। इस हादसे ने न सिर्फ़ उनकी याददाश्त पर असर किया, बल्कि उन्हें चलने-फिरने में भी अक्षम बना दिया।
लगभग एक महीने तक कोमा में रहने के बाद जब अनु होश में आईं तो वह खुद को पूरी तरह से भूल गयीं थीं।इसके बाद लगभग तीन साल चले लंबे उपचार के बाद वे अपनी धुंधली यादों को जानने में सफ़ल हो पाईं। जब वो धीरे-धीरे सामान्य हुईं तो उन्होंने अपनी सारी संपत्ति दान करके योग सिखाना शुरु कर दिया।