नई दिल्ली,  सपा-बसपा गठबंधन (SP-BSP Alliance) से बाहर होने के बाद कांग्रेस (Congress) उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी करने लगी है। तीन राज्यों में जीत से उत्साहित पार्टी को अब महसूस हो रहा है कि उत्तर प्रदेश में इस बार उसके लिए स्थितियां ज्यादा उपयुक्त होंगी और उसे फिर से पैर जमाने का मौका मिलेगा। इसलिए वह 2009 से बेहतर जीत की उम्मीद कर रही है। 

गठबंधन को लेकर कांग्रेस उदासीन

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन में शामिल नहीं होने को लेकर कांग्रेस की उदासीनता भी रही है। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने इसके लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.एल. पुनिया भी कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में महागठबंधन को लेकर उनकी सपा-बसपा के साथ कोई बैठक नहीं हुई थी। वह कहते हैं कि पार्टी सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और इसके लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। उनके अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में कई महारैलियां आयोजित की जाएंगी जिन्हें राहुल गांधी संबोधित करेंगे। 

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सपा से गठजोड़ को चूक मानती है

दरअसल, पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने सपा के साथ मिलकर लड़ा था। उसका नतीजा यह हुआ कि वह राज्य अपना दल से भी छोटी पार्टी बनकर रह गई। कांग्रेस ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा तथा सात सीटें जीती। जबकि अपना दल ने 11 सीटों पर लड़कर नौ सीटें जीती। कांग्रेस का आंतरिक विश्लेषण बताता है कि अकेले लड़ने में वह इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकती थी। दरअसल, पहले कांग्रेस ने 27 सालों में विकास अवरुद्ध होने का प्रचार किया। सपा पर आरोप लगाए। लेकिन बाद में सपा से ही गठजोड़ कर लिया। पार्टी इसे चूक मानती है।

प्रदेश इकाई भी सभी सीटों पर लड़ने के पक्ष में 

कांग्रेस सूत्रों का यह भी कहना है कि प्रदेश इकाई का जोर भी इसी बात पर है कि राज्य में सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे जाएं, भले ही नतीजे जो भी रहें। कम से कम इस बहाने पार्टी को सक्रिय होने का मौका तो मिलेगा। बता दें कि हाल में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी एक साक्षात्कार में कहा है कि पार्टी राज्य में अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी। 

सपा-बसपा गठबंधन

सपा-बसपा गठबंधन में जो फार्मूला उभर कर सामने आया है, उसके मुताबिक दोनों पार्टियां 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। इसके अलावा दो सीट रालोद को, एक अजित सिंह और दूसरे उनके पुत्र जयंत चौधरी को देने की बात सामने आई है। दो सीटें महागठबंधन के अन्य साथियों के लिए (संभावित रूप से ओम प्रकाश राजभर की पार्टी), दो सीटें रायबरेली व अमेठी कांग्रेस के लिए छोड़ने की बात सामने आई है। अन्य दो सीटें अन्य सहयोगियों के लिए रिजर्व रखी जाएंगी।

पूरी तैयारी से उतरेगी कांग्रेस

यूपी में कांग्रेस के दो सांसद हैं। रायबरेली से सोनियां गांधी और अमेठी के पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सांसद है। यूपी विधानसभा में कांग्रेस के सात विधायक हैं। कांग्रेस इस बार यूपी लोकसभा चुनाव पूरी तैयारी के साथ उतरना चाहती है। वर्ष 2009 के चुनाव में जब वह अपने दम पर लड़ी थी तो उसने 21 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

यूपी ने वाजपेयी दिया

यूपी ने भाजपा को वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी को प्रधानमंत्री के रूप में दिया। फिर वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी वर्ष 1998 में और वर्ष 1996 में 13 दिन प्रधानमंत्री रहे।