रायपुर। 15 साल पुरानी गाड़ियों को यदि बगैर री-रजिस्ट्रेशन के राजधानी की सड़कों पर दौड़ा रहे हैं तो इसका खामियाजा आपको भुगतना पड़ सकता है। ऐसे वाहनों से हादसा होने पर वाहन का बीमा होने के बाद भी बीमा कंपनी क्लेम का भुगतान नहीं करेगी।

बिना री-रजिस्ट्रेशन वाले 15 साल पुराने वाहनों के पकड़े जाने पर परिवहन विभाग कार्रवाई करता है। मोटर साइकिल का 300 रुपए और बड़ी गाड़ी का 500 रुपए प्रतिमाह फाइन के रूप में अदा करना पड़ेगा। उसके बाद परिवहन विभाग गाड़ी का री-रजिस्ट्रेशन करेगा।

ज्ञात हो कि रायपुर परिवहन कार्यालय में छोटे-बड़े मिलाकर कुल दस लाख वाहन पंजीकृत हैं। इनमें करीब 50 हजार मोटरसाइकिल और 20 हजार बड़े वाहन ने री-रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है और धड़ल्ले से राजधानी की सड़कों पर फर्राटे भर रहे हैं। इससे शासन को प्रतिवर्ष लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ऐसी गाड़ियों के खिलाफ परिवहन विभाग कार्रवाई करने के बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठा है। जिस कारण वाहन मालिकों के हौसले बुलंद हैं।
दूसरे प्रदेश से एनओसी लेकर आते हैं, नहीं कराते रजिस्ट्रेशन

दूसरे प्रदेश से एनओसी लेकर राजधानी की सड़कों पर करीब एक हजार से ज्यादा गाड़ियां दौड़ रही हैं। एनओसी लेकर आने वाले वाहन मालिकों को एक माह के भीतर परिवहन कार्यालय में जाकर रजिस्ट्रेशन कराना है, लेकिन ज्यादातर लोग रजिस्ट्रेशन नहीं करा रहे हैं। ऐसी गाड़ियों के पकड़े जाने पर प्रति माह 500 रुपए के हिसाब से परिवहन विभाग को शुल्क अदा करना पड़ेगा।
ऐसे समझें बीमा कंपनी क्यों नहीं देगी क्लेम 
परिवहन विभाग के अधिकारी ने बताया कि किसी भी वाहन का 15 साल पूरा होने के बाद उसका रजिस्ट्रेशन परिवहन कार्यालय से खुद-ब-खुद रद्द हो जाता है। रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद वाहन मालिक को री-रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। कई वाहन मालिक ऐसा नहीं कराते, जबकि बीमा करा लेते हैं। बीमा कंपनी वाहन मालिकों को अपने झांसे मे लेकर बीमा कर देती है, लेकिन वह क्लेम नहीं देती। यह कहकर क्लेम खारिज कर देती है कि परिवहन कार्यालय से वाहन का रजिस्ट्रेशन खत्म हो चुका है।

विभाग की उदासीनता के चलते चल रहीं गाड़ियां 
परिवहन विभाग के पास 15 साल पुरानी गाड़ियों के आंकड़े हैंं, लेकिन परिवहन परिवहन विभाग की टीम इन गाड़ियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर कार्रवाई नहीं कर रही है। विभाग इस संबंध में किसी प्रकार का प्रचार-प्रसार भी नहीं करता। कई वाहन मालिकों को री-रजिस्ट्रेशन की जानकारी नहीं है।
- 15 साल पुरानी गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन दोबारा कराना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन न कराने वालों को प्रतिमाह 500 रुपए अतिरिक्त शुल्क अदा करना पड़ेगा। इसके साथ ही ऐसी गाड़ियों का बीमा मान्य नहीं होता है। - पुलक भट्टाचार्य, आरटीओ, रायपुर