नई दिल्ली : पिछले कई सालों से रियलस्टेट मार्केट में चल रही मंदी अब छंटने लगी है. साल 2018 में देश में मकानों की बिक्री में इजाफा हुआ है और 8 प्रमुख शहरों में रेजिडेंशियल प्रापर्टी की बिक्री में सालाना आधार पर 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. यह जानकारी बाजार का अध्ययन करने वाली एक प्रमुख फर्म की ताजा रिपोर्ट में सामने आई है. संपत्ति सलाहकार कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इन आठ शहरों में दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और अहमदाबाद में आवासीय बिक्री बढ़ी है. वहीं कोलकाता और पुणे में गिरावट दर्ज की गई है.

सस्ते मकानों की मांग बढ़ी
इंडियन रीयल एस्टेट (जुलाई-दिसंबर 2018) शीर्षक से जारी रिपोर्ट के अनुसार ग्राहकों को लुभाने के लिए कई डेवलपरों ने मकानों की कीमत कम करने के अलावा कुछ और अप्रत्यक्ष रियायतों की भी पेशकश की. नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि सात साल के बाद 2018 में भारतीय आवास बाजार में बिक्री सुधरी है. इसकी अहम वजह सस्ते मकानों की मांग बढ़ना है.

शुरू होने वाले घरों के प्रोजेक्ट पर असर
रिपोर्ट के अनुसार बिक्री बढ़ने से शुरू होने वाले घरों के प्रोजेक्ट का स्टॉक कम हुआ है. ऐसे मकानों की संख्या 11 प्रतिशत घटकर 4.7 लाख इकाई पर आ गई है. अन्य संपत्ति सलाहकार कंपनियों की तुलना में नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में आवासीय बिक्री में बढ़ोतरी की छह प्रतिशत की दर सबसे कम है. नाइट फ्रैंक के विपरीत जेएलएल इंडिया ने 7 शहरों में आवासीय इकाइयों की बिक्री में 47 प्रतिशत, एनारॉक ने 16 प्रतिशत और प्रॉप टाइगर ने 9 बड़े शहरों में बिक्री में 25 प्रतिशत बढ़ने का आंकड़ा पेश किया है.


मकान बिकने का अनुमान
नाइट फ्रैंक के अनुसार वर्ष 2018 में 2,42,328 मकान बिकने का अनुमान है. जबकि 2017 में यह आंकड़ा 2,28,072 मकान का था. इसमें सालाना आधार पर सबसे अधिक वृद्धि बेंगलुरु में 27 प्रतिशत दर्ज की गई. वहीं दिल्ली-एनसीआर में बिक्री में आठ प्रतिशत वृद्धि हुई. इसमें भी सबसे अधिक आवासीय इकाइयां नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिकीं. वर्ष 2017 की तुलना में कोलकाता में बिक्री 10 प्रतिशत और पुणे में एक प्रतिशत घटी.