रायपुर। दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर्स के लिए कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। ये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की तरह ही होंगे। एम्स के डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकते हैं तो यहां भी यही नियम-शर्तें होंगी। इसके एवज में डॉक्टर्स के वेतन में तीन गुना तक इजाफा हो सकता है। यह सारी कवायद इसलिए है, ताकि राज्य के जरूरतमंद मरीज, जो जटिल बीमारियों से पीड़ित होते हैं, उन्हें समय पर उपचार मिल सके।

वर्तमान में डॉक्टर्स अपने ड्यूटी समय के बाद निजी अस्पतालों में सेवाएं देते हैं। डॉक्टर्स का तर्क भी अपनी जगह सही है। कहते हैं कि निजी अस्पताल में सुपरस्पेशलिस्ट को तीन लाख रुपये तक वेतन मिलता है, जबकि डीकेएस में 80 हजार। ऐसे में अगर हम प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं तो गलत क्या है?

मध्यप्रदेश में तीन सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल खोले गए हैं, वहां भी यह फॉर्मूला अपनाया गया है। डीकेएस सर्व-सुविधायुक्त हॉस्पिटल है। यहां सेवाएं किसी भी निजी अस्पताल से कमतर नहीं। बस प्रबंधन के सामने चिंता है तो डॉक्टर्स भागें नहीं, वे खुद को सुरक्षित महसूस करें।

डीकेएस में वर्तमान में मिल रहीं सेवाएं- न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, कॉर्डियोलॉजी, गेस्ट्रो एंट्रोलॉजी शामिल हैं। ये सभी यूनिट नवंबर 2018 तक डॉ. आंबेडकर अस्पताल का हिस्सा थीं।

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स के पास अभी दो विकल्प

पहला- अगर वे प्राइवेट प्रैक्टिस करना चाहते हैं तो उन्हें नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) नहीं मिलेगा। डॉक्टर ड्यूटी ऑवर के बाद अपने क्लिनिक में प्रैक्टिस कर सकते हैं। हालांकि पूर्व में हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसमें नई गाइड लाइन बनी है। इसके तहत डॉक्टर सिर्फ अपने ही क्लिनिक में प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं। यह सिर्फ तीन घंटे ही होगी। हाईकोर्ट के आदेश पर डॉक्टर्स ने शपथ-पत्र भी दिए हैं।

दूसरा- जो एनपीए लेते हैं उन्हें बेसिक सैलेरी का 20 फीसद अतिरिक्त भुगतान होता है। बतौर उदाहरण डॉक्टर की बेसिक सैलेरी एक लाख रुपये है तो 20हजार रुपये मासिक उन्हें एनपीए मिलता है। यह राशि पहले 25 फीसद थी, पिछली सरकार ने इसमें कटौती की थी।

नौकरी छो़ड़ जा चुके हैं डॉक्टर्स- सुपरस्पेशलिट डॉक्टर्स को निजी अस्पताल ढ़ाई से चार लाख रुप्ये तक वेतन देते हैं, लेकिन यह सरकारी अस्पतालों में इतना वेतन नहीं मिलता। यही वजह है कि कई डॉक्टर नौकरी छोड़ जा चुके हैं। सबसे ज्यादा असर डॉ. आंबेडकर अस्पताल को पड़ा है।

डायरेक्टर के बैठने से ये होंगे फायदे

आइएएस आर. प्रसन्ना ने बतौर डीकेएस के डॉयरेक्टर के रूप में पद संभाल लिया है। इनके आने से प्रशासनिक कामों में तेजी आएगी। बार-बार नया रायपुर की तरफ दौड़ नहीं लगानी होगी। इसके पूर्व विभाग के सचिव डायरेक्टर होते थे, जो समय नहीं दे पाते थे। हालांकि वर्तमान में प्रसन्ना के पास तीन-तीन प्रभार हैं।

- डीकेएस को लेकर काफी प्लानिंग चल रही हैं। प्राइवेट प्रैक्टिस पर प्रतिबंध और वेतन बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। बिल्कुल शासन का मकसद एक ही है कि हर मरीज को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाई जाए। भले ही इसके लिए कुछ कड़े फैसले ही क्यों न करने पड़ें। - आर. प्रसन्ना, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं एवं डायरेक्ट डीकेएस सुपरस्पेशलिस्टी हॉस्पिटल