नई दिल्ली । दुनिया की टॉप फूड कंपनियों में शामिल नेस्ले अपने नूडल्स ब्रांड मैगी के बारे में 'विश्वसनीय तथ्य पेश करने वाले विज्ञापन जारी करने की योजना में है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन में कंपनी के खिलाफ सरकार के मामले को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी थी। नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने बताया, एक साख वाली और जिम्मेदार कंपनी के तौर पर हमारी कोशिश हमेशा उपभोक्ताओं को तथ्यों की आसान, स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से जानकारी देने की होती है। आप यही अगले कुछ दिनों में प्रिंट विज्ञापनों में देखने में मिलेगा। फूड रेगुलेटर फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने लेड के तय लिमिट से अधिक होने और लेबल पर गलत जानकारी देने के कारण मैगी नूडल्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे देश में इंस्टेंट नूडल्स कैटेगरी लगभग समाप्त हो गई थी। इसके बाद नेस्ले को 450 करोड़ रुपये का नुकसान उठा पड़ा था और उसने 30,000 टन से अधिक मैगी नूडल्स को नष्ट किया था। इसके बाद नेस्ले ने प्रिंट,टेलीविजन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कैंपेन चलाकर 'मैगी नूडल्स के सुरक्षित होने' का दावा किया था। हालांकि,कंपनी के इस कदम में कुछ देरी हुई थी और तबतक ब्रांड की साख को काफी नुकसान हो चुका था। प्रतिबंध के बाद सरकार ने एनसीडीआरसी  में याचिका दायर कर नेस्ले पर गलत कारोबारी तरीकों का इस्तेमाल करने, भ्रामक विज्ञापन देने का आरोप लगाया था और कंपनी से कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 के प्रोविजंस के तहत 640 करोड़ का हर्जाना मांगा था। 
प्रतिबंध के पांच महीनों के बाद सरकारी अथॉरिटीज ने मैगी को बिक्री की अनुमति दे दी थी। इसके बाद मैगी दोबारा से कैटेगरी पर पहले स्थान पर पहुंच गया था। इसका मौजूदा मार्केट शेयर लगभग 60 प्रतिशत है। 3 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा, मैगी नूडल्स में लेड क्यों होना चाहिए? मैं लेड के साथ मैगी नहीं खाउंगा। बच्चों को लेड के साथ मैगी क्यों खानी चाहिए? बेंच ने कहा कि मैसुरु के सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट कार्यवाही का आधार बनेगी। इस इंस्टीट्यूट में मैगी नूडल्स के सैंपल की जांच की गई थी। नेस्ले की भारत में बिक्री में मैगी नूडल्स की बड़ी हिस्सेदारी है।