रायपुर। सेहत सबसे बड़ा खजाना। राजधानी से सटे इन पांच गांवों के लोगों ने इसे ही मूलमंत्र मानते हुए इसे दिनचर्या शुरू करने का आधार बना लिया है। राजधानी रायपुर से लगे दतरेंगा, सेजबहार, डोमा, खिलोरा और सोनपैरी गांव के लोगों में सेहत बनाने का ऐसा जुनून है कि लोगों ने इन पांचों गांव के बीच की कॉमन सड़क को मॉर्निंग वॉक का ट्रैक बना डाला है।

रोजाना गांव के बड़े-बुजुर्ग व महिलाएं सूर्योदय के पहले मॉर्निंग वॉक के लिए निकल जाते हैं। उधर शहर सोता रहता है इधर, सभी ग्रामीण लगभग पांच किलोमीटर मार्निंग वॉक कर घर लौट चुके होते हैं। जब सड़क पर इतने ग्रामीण उतरते हैं तो लगता है कि कहीं कुछ हो गया है, उस समय सड़क पर निकलने वाले इक्का-दुक्का वाहन चालक भी कई बार हैरत में पड़ जाते हैं।
सेजबहार नाले पर बने पुल पर पांचों गांव के लोग एकत्र होकर योग और कसरत भी करते हैं। यह सब स्वतः स्फूर्त शुरू हुआ। बरसों पहले कुछ युवाओं ने इसकी शुरुआत की इसके बाद देखा-देखी लोग जुड़ते गए, कारवां बनता गया।

अलसुबह साढ़े चार बजे से टहलान
डोमा गांव निवासी घासीराम सोनवानी बताते हैं कि पांचों गांव के लोग लगभग साढ़े चार बजे मॉर्निंग वॉक के लिए निकलते हैं और उजाला होने से पहले घर लौट जाते हैं। कुछ लोग दतरेंगा से लेकर खिलोरा चौक तक लगभग पांच किलोमीटर लंबा मार्निंग वॉक करने जाते हैं इसलिए उनके वापस लौटने में ज्यादा वक्त लगता है। दूसरी ओर महिलाएं, बच्चों और बुजुर्ग लगभग तीन किलोमीटर का वॉक पूरा करते हैं।

मार्निंग वॉक के दौरान ही हाल-चाल भी
आमतौर पर देखा जाता है जब लोग कहीं जाते हैं तो अपने हमउम्र के लोगों के साथ चलना पसंद करते हैं। वही कहानी यहां भी है। मार्निंग वॉक के दौरान जो लोग परिवार के साथ निकलते हैं, वे तो परिवार वालों के साथ चलते हैं लेकिन बाकी लोग अपने हमउम्र साथियों के साथ चलना पसंद करते हैं। बुजुर्ग, अपने बुजुर्ग साथियों की टीम में चलते हैं। महिला, अपनी महिला साथियों की टीम में चलती हैं। अपने-अपने घर से निकलते वक्त एक-दूसरे को लेते हुए आगे बढ़ते हैं। इस बीच हाल-चाल का सिलसिला भी जारी रहता है।

दिन भर शहर में काम, सुबह वॉक
शहरी रहन-सहन में इन दिनों दिनचर्या कुछ अस्त-व्यस्त सी हो चली है। ज्यादातर युवा देर रात सोते हैं और सुबह लेट उठते हैं लेकिन इन पांच गांवों के युवाओं की कहानी बिल्कुल उलट है। गांव के युवा काम करने के लिए सुबह ही राजधानी रायपुर निकल जाते हैं और रात तक घर पहुंचने के बाद भी तड़के चाढ़े चार-पांच बजे से मार्निंग वॉक के लिए निकल पड़ते हैं।

मार्निंग वॉक के दौरान बजते हैं गाने
जीवन में गीत-संगीत का अलग ही महत्व है, आनंद है। शहरी क्षेत्र में मार्निंग वॉक करने वाले इयरफोन लगाकर निकलते हैं। इसके उलट इन पांच गांवों के युवा भी गीत-संगीत तो सुनते हैं लेकिन इयरफोन का इस्तेमाल नहीं करते ...स्पीकर चालू, गाना शुरू। साथ के सारे लोग उठाते हैं आनंद।

कसरत क्षेत्र है पुल

दतरेंगा-खिलोरा मार्ग पर चार पुल हैं लेकिन सेजबहार नाले का पुल सबसे ऊंचा और बड़ा है। यह पुल पांचों गांवों के केंद्र में भी है इसलिए ग्रामीण अपने गांव से चलकर इसी पुल पर रुकते हैं। यहीं कसरत व योगा करते हैं। कुछ ग्रामीण दूसरे पुलों पर भी योगा करते हैं लेकिन सेजबहार का पुल सबसे बड़ा केंद्र है। खिलोरा गांव के मंचलाल यादव बताते हैं कि सेना भर्ती की तैयारी करने वाले युवा दौड़ लगाकर जब लौटते हैं, तो वे भी सेजबहार पुल पर कसरत करते हैं।