जबलपुर। कांग्रेस का यह इतिहास रहा है कि वह संवैधानिक संस्थाओं पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आरोप लगाकर उनकी गरिमा को भंग करती रही है। यदि ईवीएम कांग्रेस के विरुद्ध ही चलती, तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार कैसे बन जाती ? यदि ईवीएम भारतीय जनता पार्टी के समर्थन में ही काम करती है तो फिर भारतीय जनता पार्टी को किसी भी चुनाव क्षेत्र में पराजित नहीं होना चाहिए। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद राकेश सिंह ने बुधवार को जबलपुर में जारी वक्तव्य में कही। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपनी संभावित हार से भयभीत है और उसे पता है कि जनता ने उसे चौथी बार भी नकार दिया है। इसलिए वह ईवीएम को लेकर आरोप लगा रहे हैं, ताकि हार का ठीकरा किसी और के सिर फोड़ा जा सके। 
प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद राकेश सिंह ने कांग्रेस द्वारा ईवीएम को लेकर किए जा रहे प्रलाप को बेबुनियाद बताते हुए इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के नेताओं को पता है कि वह बुरी तरह हार का सामना करने वाले हैं, इसलिए कांग्रेस के लोगों ने मतदान के दिन से ही ईवीएम को लेकर प्रलाप करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हार के बाद यही बयान देने वाली है कि ईवीएम में गड़बड़ी के कारण पराजय हुई है। कांग्रेस के नेता जनहित के काम करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं और वे इस विषय से ध्यान भटकाने के लिए मध्यप्रदेश के वातावरण को विषाक्त और दूषित करना चाहते हैं।
घपले, घोटालों से बाहर नहीं आना चाहती कांग्रेस
प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने कहा कि सच्चाई यह है कि कांग्रेसी घपले घोटालों के अपने काले अध्याय से बाहर नहीं आना चाहते हैं। आज वह जिस प्रकार से चुनाव प्रक्रिया को लांछित करने पर उतारू हैं, इससे स्पष्ट है कि चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होने के कारण कांग्रेस के पेट में मरोड़ हो रही है। यह इस बात का भी संकेत है कि पिछले पांच-छह दशकों तक लगातार सरकारों में रही कांग्रेस शायद चुनाव में गड़बड़ियां कराकर ही सत्ता प्राप्त करती रही होगी। लेकिन अब उसको समझ लेना चाहिए कि भारत में अब पारदर्शिता, शुचिता और ईमानदारी का युग आ गया है,  इसलिए उसकी इस प्रकार की कोई भी चाल अब कामयाब नहीं होगी।
बेतुकी मांग चुनाव आयोग पर दबाव बनाने का हथकंडा
 प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने कहा कि कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर जो बेतुकी मांग रखी है, वह संवैधानिक संस्था पर अतिरिक्त और अनुचित दबाव बनाने का प्रयास है। प्रतिनिधिमंडल में शामिल नामचीन वकीलों को अच्छी तरह पता है कि मतगणना के हर राउंड के बाद आंकड़ों की फोटोकॉपी संबंधित विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा राजनीतिक दलों को दी जाती है। इसके बावजूद कांग्रेस ने मांग की है कि मतगणना के प्रत्येक राउंड का सर्टिफिकेट जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा प्रमाणित कर दिया जाए। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कांग्रेस की इस मांग को सिरे से नकार दिया है। अपनी यह चाल भी नाकाम होने से कांग्रेस बौखला गई है।
आयोग के खिलाफ पहले से माहौल बना रही कांग्रेस
सिंह ने कहा कि चुनाव से पूर्व ही कांग्रेस ने चुनाव आयोग के विरुद्ध वातावरण बनाना शुरू कर दिया था। चुनाव आयोग पर फर्जी मतदाता सूची जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, लेकिन आयोग ने जब पूरी सतर्कता और परिश्रम के साथ इस मतदाता सूची  का परीक्षण निरीक्षण कराया तो कोई फर्जी मतदाता नहीं मिला। कांग्रेस ने इस मोर्चे पर भी बुरी तरह मुंह की खाई, लेकिन बेशर्मी की पराकाष्ठा देखिए कि कांग्रेस नए-नए विषय रोज लेकर आती है। उन्होंने कहा कि जहां तक ईवीएम के लेट पहुंचने का विषय है, तो इसका भारतीय जनता पार्टी या सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। सारी व्यवस्थाएं चुनाव आयोग के अधीन हैं और चुनाव आयोग लापरवाही के मामलों में जो कार्यवाही करना चाहिए वह करता ही है और कर भी रहा है।