नई दिल्ली: मोदी सरकार रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को और सरल बनाएगी. इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के लिए अब आपको सिर्फ हस्ताक्षर करने की जरूरत पड़ेगी. बाकी का काम इनकम टैक्स विभाग करेगा. यानी इनकम टैक्स आईटीआर भरकर खुद आपको भेजेगा. अगर कुछ संशोधन करने की जरूरत होगी तो आप उसे कर सकते हैं. सरकार जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के फॉर्म को सरल बनाएगी. इस कदम से कारोबारियों को सुविधा होगी. 

पहले से भरा ITR फॉर्म लाने की तैयारी
सरकार इसके लिए पहले से भरे हुए ITR फॉर्म लाएगी. एम्प्लॉयर और बैंक से डाटा इकट्ठा करके आपके लिए तैयार इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में मदद करेंगे. सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने कहा कि IT रिटर्न तेजी से भरने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है. प्री-फिल्ड इनकम टैक्स रिटर्न सीधे तौर पर या फिर संशोधन के साथ जमा किया जा सकता है. यह खर्च और आय पर आधारित होगा.

नया फॉर्म उन लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए जो आईटीआर फाइल करने की प्रक्रिया की जटिलता से डरकर उसे फाइल नहीं करते. यह आयकर विभाग का एक प्रयास है कि प्रक्रिया को टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाया जाए और अधिकारियों की दखलअंदाजी को कम से कम किया जाए. 

टैक्स एक्सपर्ट अभिषेक गोयनका के मुताबिक, "लगभग 80-90% करदाताओं के पास केवल सैलरी की इनकम होती है और बहुत कम लोगों की आय के अन्य स्रोत हैं. प्री-फिल्ड इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म से कंप्लायंस बढ़ जाएगा और छोटे करदाताओं का बोझ कम हो जाएगा." जिन लोगों के स्रोत पर कर की कटौती हुई है, उन्हें रिटर्न दाखिल करने के लिए टैक्स प्रोफेशनल की जरूरत नहीं होगी. 
  
राजस्व सचिव अजय भूषण पांडेय ने बताया कि जीएसटी रिटर्न भरने के लिए एक अप्रैल 2019 को नया और सरल फॉर्म जारी किया जाएगा. सरकार ने फॉर्म को सहज और सुगम बनाने के लिए संबंधित पक्षों से राय भी मांगी थी. उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार जीएसटी संग्रह के अपने बजट को हासिल कर लेगी. साथ ही इसके मासिक लक्ष्य को बढ़ाकर 1.10 लाख करोड़ रुपये करना चाहते हैं. 
 
जीएसटीआर-3बी फॉर्म
जीएसटीआर-3बी फॉर्म स्वघोषित रिटर्न दाखिल करने जैसा है इसे संक्षिप्त बिक्री रिटर्न फॉर्म भी कहते हैं. इसमें कुल लेनदेन, बिक्री और खरीदारी व टैक्स का अनुमानित ब्योरा देते हैं. सभी सौदों के अलग विवरण की जरूरत नहीं होती. जीएसटी में पंजीकृत हर कारोबारी को यह फॉर्म अनिवार्य होता है.

टैक्सपेयर को और भी राहत दी
टैक्सपेयर्स 2017-18 के साल के लिए मार्च 2019 तक फाइन के साथ रिटर्न फाइल कर सकते हैं. अगर इसे भरने में 31 अगस्त से ज्यादा देर हो जाती है और दिसंबर के पहले भर देते हैं तो 5000 रुपए फाइन लगेगा. अगर दिसंबर के बाद भरते हैं तो फाइन दोगुना लगेगा. कॉरपोरेट एंटिटीज के इनकम टैक्स फाइल करने में भी इजाफा हुआ है. पिछले साल 7 लाख रिटर्न के मुकाबले इस साल 8 लाख रिटर्न फाइल हुए हैं.