नांदेडः महाराष्ट्र के नांदेड में चौथी बार अंगदान करने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. नांदेड में एक मजदूर के अंगदान से चार लोगों को नई जिंदगी मिली है, तो दो लोगों को दृष्टि मिली है. नांदेड के लोहा तहसील के मलाकोल गांव में 30 साल के भुजंग मस्के को नांदेड में लाया गया. मंदिर को रंग लगाते वक्त मजदूर भुजंग मस्के नीचे गिरा था. उसी में डॉक्टरो ने उसे ब्रैन डेड घोषित किया. सोलापुर में ये घटना घटी. इलाज करके उसे नांदेड लाया गया. 8 दिन के इलाज के बाद भी उसका शरीर साथ नहीं दे रहा था. डॉक्टरों की सलाह से उसके परिवार ने उसके अवयव (Organ) दान का फैसला किया.

भुंजग का हार्ट, किडनी, लिवर और दोनों आंखों को दान किया गया. इस दौरान निजी अस्पताल से नांदेड एअरपोर्ट तक का समय 4 मिनट 15 सेकंड में पूरा किया गया. ये रास्ता लगभग 6 किलोमीटर का था. स्पेशल फ्लाईट से भुजंग का हार्ट मुंबई की कोकिलाबेन अस्पताल में लिया गया, लिवर और किडनी औरंगाबाद के एमजीएम अस्पताल में लाए गए. आँखे नांदेड में ही दान की गई है.

ब्रेन डेड रहे भुजंग के अंगदान करने से 4 लोगों को नई जिंदगी मिली है और दो लोगों की आंखों को रोशनी मिली है. 

भुंजग के भाई राजू मस्के का कहना है कि हमारा भाई ब्रेन डेड घोषित किया गया. जिसके बाद डॉक्टरों ने हमें सलाह दी कि उसके अंग दान कर दीजिए. हमने उनकी सलाह मानी. आज हमारे भाई के अंग दान करने से इन मरीजों को नई जिंदगी मिली है. उनमें ही हमें अपना भाई दिखाई देगा.

वहीं इलाज कर रहे है डॉक्टर विजय मेदकवाड का कहना है कि ,हमने ग्रीन कोरिडोर बनाया और इस ब्रेन डेड पेशंट के अंग फ्लाईट से औरंगाबाद और मुंबई भेज गए. युवा व्यक्ति होने के कारण उसके हार्ट, किडनी, आँखे, लिवर ये मुख्य अंग दान हो सके. अब नांदेड में एक किडनी प्रत्यारोपण की पहली सर्जरी की जायेगी. किडनी प्रत्यारोपण की ये नांदेड की पहली सर्जरी होगी.