भोपाल - मध्यप्रदेश में ऐतिहासिक मतदान के साथ विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया सम्पन्न हो चुकी और अब हर तरफ परिणाम को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में वापसी करती है या फिर भाजपा चैथी बार काबिज होगी, यह यक्ष प्रश्न है, लेकिन सबके अपने-अपने दावे हैं, सबका अपना-अपना अनुमान है। भाजपा जहां अपनी योजनाओं के हितग्राहियों को जीत का आधार मानकर चल रही है, वहीं एंटी इन्कम्बेंसी की नाव पर सवार कांग्रेस अपने वचन पत्र के कुछ मुद्दों को सत्ता में आने के लिए पर्याप्त मानकर चल रही है। दावा किया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने लगातार ट्वीट कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े प्रदेश के ढाई हजार कर्मचारियों  को नियमित करने के साथ ही पुलिस कर्मियों के लिए जो घोषणाएं कीं, वो कांग्रेस की वापसी का द्वार खोल सकती है। 

कांग्रेस ने चुनाव के लिए अपने वचन पत्र में जो प्रमुख वायदे जनता से किए हैं, उनमें किसानों की दस दिन के अंदर कर्ज माफी और बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नकद देने के मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कुछ घोषणाएं ट्विटर और बयानों के माध्यम से भी की थीं, जिनमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के कर्मचारियों का नियमितीकरण और पुलिसकर्मियों को अवकाश देने की घोषणा का भी कांग्रेस की जीत में अहम योगदान होने का दावा किया जा रहा है। सबसे पहले बात करते हैं आजीविका मिशन से संबद्ध स्व सहायता समूहों के कर्मचारियों की।  प्रदेश में इन कर्मचारियों की संख्या 2500 है। इन्हें तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बहुत कम वेतन मिलता है। आजीविका मिशन राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाला महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इससे प्रदेश में कोई दो लाख स्व सहायता समूह जुड़े हुए हैं। इन समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार आर्थिक सहायता देती है। बताया जा रहा है कि ये समूह ग्रामीण क्षेत्र में बेहद सक्रिय हैं और इनमें महिलाएं भी बहुत बड़ी संख्या में जुड़ी हैं। माना जा रहा है कि महिलाओं की अधिक वोटिंग के पीछे भी आजीविका मिशन के कर्मचारियों और 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हिस्सेदारी रही है। हालांकि भाजपा इसे अपने पक्ष में मान रही है, लेकिन जो चर्चाएं चल रही हैं, उन पर भरोसा करें तो कमलनाथ के ट्वीट का असर ज्यादा है। असल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने केवल ट्वीट ही नहीं किया, आजीविका मिशन के कर्मचारियों से समन्वय स्थापित करने के लिए आशीष शर्मा नामक व्यक्ति को जिम्मेदारी भी दे दी थी। मध्यपदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अधिकारी-कर्मचारी संघ की ओर से बाकायदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को आभार पत्र भी अग्रिम रूप से दिया जा चुका है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने कमलनाथ से मुलाकात कर मुद्दों पर चर्चा की थी, जिस पर उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार बनी तो उन्हें तत्काल नियमित कर दिया जाएगा। यही नहीं कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में स्व सहायता समूहों का भी कर्ज माफ करने ओर हर समूह को 10-10 सिलाई मशीन देने का वायदा भी किया है। ये दोनों बातें स्व सहायता समूहों से जुड़े कोई एक करोड़ लोगों के हित में होंगी, इसीलिए दावा किया जा रहा है कि इन समूहों के जितने भी वोट पड़े होंगे, निश्चित तौर पर उनका बड़ा हिस्सा कांग्रेस के पक्ष में जाएगा। 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने वचन पत्र के बाद ट्वीट के माध्यम से भी कई घोषणाएं की थीं। पुलिस कर्मियों के लिए जो ऐलान कमलनाथ ने किए, उनमें कांग्रेस की सरकार प्रदेश में बनी तो हम पुलिसकर्मियों की ड्यूटी को सरल, तनावमुक्त, अवसाद मुक्त एवं सुरक्षित बनायेंगे। पुलिसकर्मियों को सप्ताह में एक दिन का अवकाश दिया जाएगा। पुलिस कर्मचारियों के प्रतिदिन के ड्यूटी समय को कम किया जाएगा। 50000 नई पुलिस भर्ती कर बल की कमी को दूर किया जाएगा। पुलिस की सभी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ पुलिसकर्मियों को तनावमुक्त, अवसाद-मुक्त और मध्यप्रदेश को अपराध मुक्त बनाने का सपना भी पूरा किया जाएगा। कहने को तो भाजपा सरकार ने भी पुलिस कर्मचारियों के लिए कई घोषणाएं की थीं, लेकिन पता यह चला कि कुछ भी नहीं हुआ। पूर्व में गृहमंत्री रहे बाबूलाल गौर ने भी ऐलान किया था कि पुलिस कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जाएगा, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका। इसे लेकर पुलिसकर्मियों में कहीं न कहीं सरकार के प्रति नाराजगी मानी जा रही है। पिछले दिनों पुलिस परिवार ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया था, सप्ताह में एक दिन के अवकाश को लेकर लम्बे समय से मांग चल रही थी। यही कारण है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने पुलिसकर्मियों की दुखती रग पर हाथ रख दिया और उन्हें तमाम आश्वासन दे डाले। 

अपने वचन पत्र के माध्यम से कांग्रेस ने सरकारी स्थलों पर संघ की गतिविधियों में प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। इसे लेकर हालांकि संघ और भाजपा दोनों ही हमलावर हो गए, लेकिन सही बात तो यह है कि संघ एक सामाजिक-सांस्कृतिक ठेठ हिंदूवादी संगठन है। इसके बाद भी संघ लगातार शासकीय स्थलों और सार्वजनिक स्थानों का अपनी गतिविधियों के लिए उपयोग करता आया है। यही नहीं सरकारी कर्मचारी खुलकर संघ की शाखा में आते-जाते हैं और कार्यालयों में भी कई बार गतिविधियां देखी जाती हैं। यह बात और है कि इसे आज तक पंजीकृत नहीं कराया गया, परंतु इसके एक दर्जन से अधिक सहयोगी संगठन भी हैं। इसे भारतीय जनता पार्टी की मातृसंस्था भी कहा जाता है। देखा जाए तो संघ शुरू से ही दावा करता है कि न तो वह राजनीतिक संगठन है और न ही राजनीति में कोई हस्तक्षेप करता है। परंतु एक सच्चाई यह भी है कि भारतीय जनता पार्टी पर पूरी तरह से नियंत्रण संघ का ही रहा है। आज भी भाजपा की दशा और दिशा तय करने में प्रमुख भूमिका संघ ही तय करता है। संघ की प्रमुख बैठकों में भाजपा के प्रमुख नेताओं की उपस्थिति होती है। भाजपा के संगठन मंत्री और महामंत्री भी संघ की ओर से भेजे गए पदाधिकारी ही होते हैं। संघ प्रचारकों की भाजपा के पदाधिकारियों से लेकर टिकट चयन और यहां तक कि मंत्री और मुख्यमंत्री तक बनाने में भूमिका होती है। यह सब परदे के पीछे से ही होता आया है। गड़बड़ करने वालों की संघ के दरबार में पेशी भी होती है। संघ से जुड़े शिशु और विद्यामंदिरों के साथ ही वनवासी स्कूलों या अन्य सहयोगी संगठनों के परिसरों-भवनों में इनकी गतिविधियां चलती हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला और प्रियंका चतुर्वेदी कहते हैं कि संघ की गतिविधियों पर रोक से आम जनता का लाभ ही होगा, भले ही संघ और भाजपा इसका विरोध कर रहे हैं। 

वैसे युवाओं को बेरोजगारी भत्ता, किसानों की कर्ज माफी सहित जो वायदे कांग्रेस ने जनता से किए हैं, उनका भी लाभ उसे मिल सकता है। किसानों को प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपए बोनस, राहत, मुआवजा के साथ ही भावांतर का लाभ देने का दावा किया है, लेकिन सही बात तो यह है कि किसान आज भी प्रदेश सरकार से खुश नहीं है। उस पर मंदसौर में किसानों पर गोलियां चलवाई गईं। यह मुद्दा आज भी जीवित है। इस मुद्दे का असर सबसे ज्यादा मालवा क्षेत्र में बताया जा रहा है। बाकी पूरे प्रदेश में किसानों के आक्रोश का सामना भाजपा को करना पड़ा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी सभाओं में साफ ऐलान किया है कि कांग्रेस की सरकार बनते ही दस दिन के अंदर किसानों के कर्ज माफ कर दिए जाएंगे। इसके लिए एक सीमा तय कर दी गई है। यही कारण है कि कांग्रेस मान कर चल रही है कि किसानों का रुझान उसके प्रति होगा। इसके साथ ही बेरोजगारी भत्ता कांग्रेस का दूसरा ब्रह्मास्त्र है, जिसके माध्यम से उसे युवाओं के बड़ी संख्या में वोट मिले होंगे, ऐसा माना जा रहा है। असल में भाजपा ने अपने चुनावी एजेंडे में हर साल पांच लाख युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी। लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाई है। औ्रद्योगिक निवेश के भी बड़े-बड़े दावे किए गए, पर यथार्थ में कोई बड़ी परियोजना नहीं आई। बड़े उद्योगों ने करार किया, पर कारखाने नहीं लगे। बिजली परियोजनाएं भी जो कांग्रेस द्वारा शुरू की गई थीं, उनके अलावा बाकी कोई नई परियोजना भाजपा द्वारा नहीं लाई गई। महिला अपराध रोकने के लिए भी कांग्रेस ने नई रणनीति का मसौदा पेश किया है। अब यह जनता पर निर्भर है कि वह उसे पसंद करती है या नहीं। कुल मिलाकर देखा जाए तो वचन पत्र और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तथा प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने जो समय≤ पर घोषणाएं की, उनका जनता के बीच संदेश तो निश्चित तौर पर सकारात्मक गया है। चुनाव परिणाम बताएंगे कि वोटों का रुझान कितना रहा।