ये कावासाकी कोई मोटर साइकिल नहीं बल्कि, डेंगू, चिकनगुनिया और ज़ीका के बाद ये एक वायरस का नाम है. कावासाकी बुखार लोगों को डरा रहा है. वायरस से होने वाली ये बीमारी अभी मध्य प्रदेश में नहीं फैली है, लेकिन इससे मिलते-जुलते लक्षण दिखाई दिए हैं, जो ख़तरे की घंटी है. ख़तरा इसलिए भी ज़्यादा है क्योंकि जापानी वायरस से ही होने वाले जापानी बुखार से भोपाल में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है.

कावासाकी बुखार वैसे तो किसी को भी हो सकता है. लेकिन ज़्यादातर इसकी मार नवजात शिशुओं से लेकर पांच साल तक के बच्चों पर पड़ती है. डॉक्टर इसे काफी ख़तरनाक बताते हैं. इससे पीड़ित बच्चों की हार्ट अटैक से मौत तक हो जाती है. शुरुआती स्तर पर लोग इसे एलर्जी समझ बैठते हैं और बस यहीं चूक हो जाती है.

दरअसल ये एलर्जी या त्वचा रोग ना होकर कावासाकी नाम की बीमारी भी हो सकती है. शुरुआती दौर में इस बीमारी के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता लेकिन जांच के बाद वायरस की पुष्टि होने पर इसका तत्काल इलाज ज़रूरी है वरना ये रोग जानलेवा हो सकता है.
डॉक्टर के मुताबिक कावासाकी बीमारी के लक्षण शरीर में दिखते ही तत्काल उसका इलाज कराया जाना चाहिए. इस बीमारी में शरीर के विभिन्न हिस्सों में सूजन और छाले पड़ जाते हैं. उसे तेज़ बुखार आएगा और स्किन निकलने लगेगी. गले में लिम्फ नोड्स में सूजन होगी और उसके होंठ सूखने-फटने लगेंगे. जीभ में सूजन, पैर के तलवों और हथेलियों में सूजन, आंखें लाल हो जाएंगी. इसके साथ ही मरीज़ को उल्टी, दस्त, जोड़ों में दर्द और पूरे शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं और आख़िर में हार्ट अटैक तक हो सकता है.

कावासाकी ने अभी मध्य प्रदेश में दस्तक नहीं दी है, लेकिन जापानी बुखार से मध्य प्रदेश में अब तक दो लोगों की मौत हो चुकी है, इसलिए सतर्क रहने की ज़रूरत है.