बाइबिल में लिखा है कि हमें जो दिखता है, हम उसके सहारे नहीं, बल्कि अपने विश्वास के सहारे चलते हैं। प्रश्न है कि यह विश्वास क्या है और कैसे कार्य करता है? विश्वास और आत्मविश्वास में क्या अंतर है? हर व्यक्ति में कार्य करने की अपरिमित क्षमताएं अंतर्निहित होती हैं, लेकिन कुछ व्यक्ति सामान्य से कार्य भी नहीं कर पाते। वहीं दूसरी ओर कुछ लोग अपनी क्षमता का भरपूर उपयोग करके असंभव से लगने वाले कार्यों में भी सफलता प्राप्त कर लेते हैं। यह व्यक्ति की सोच पर निर्भर करता है कि वह क्या कर सकता है और क्या नहीं। किसी व्यक्ति की अपनी क्षमताओं का प्रयोग करने की शक्ति का स्तर ही उसका आत्म-विश्वास है।
एक प्रश्न और उठता है कि हमारे आत्म-विश्वास का निर्धारण कौन करता है? हमारा परिवेश, हमारी परंपराएं, हमारी शिक्षा-दीक्षा व प्रशिक्षण मुख्य रूप से हमारे आत्म-विश्वास को निर्धारित करते हैं। ये सारे तत्व हमारे मन की एक विशेष प्रकार की कंडीशनिंग कर देते हैं। हम उससे अधिक न तो सोच सकते हैं और न ही करने का साहस कर सकते हैं। सोच को सकारात्मक बनाकर हम अपने आत्म-विश्वास में वृद्धि कर सकते हैं और इस आत्म-विश्वास के द्वारा अपेक्षाकृत कठिन कार्य भी सरलता से कर सकते हैं।
कहा गया है कि किसी भी स्थिति में अपने आत्म-विश्वास को कमजोर मत होने दो। हमारे आत्म-विश्वास का सीधा प्रभाव हमारे न्यूरॉन्स अथवा मस्तिष्क की कोशिकाओं पर पड़ता है जो विचार के क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी होती हैं। आत्म-विश्वास के कारण हमारी बिखरी हुई ऊर्जा एकाग्र होकर असंभव से असंभव कार्य को सरलता से कर डालती है।

यह हमारे आत्म-विश्वास की कमी के कारण ही होता है कि हम किसी कार्य को या तो प्रारंभ ही नहीं कर पाते और प्रारंभ कर भी देते हैं तो उसे पूरा नहीं कर पाते या फिर किसी तरह से आधे-अधूरे मन से करते हैं। आत्म-विश्वास के अभाव के कारण ही अनेक व्यक्ति कोई साहसिक कार्य नहीं कर पाते अथवा जीवन में कोई जोखिम नहीं उठा पाते। यह जोखिम ही है जो महत्वपूर्ण और बड़े कार्यों के करने और उनमें सफलता प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।
दुनिया में अगर कोई व्यक्ति कोई कार्य कर सकता है, फिर हम भी उसे कर सकते हैं। यही बड़ी सोच अथवा आत्म-विश्वास की पराकाष्ठा है। तभी तो कहा गया है कि लोग शारीरिक बल की कमी से अपने जीवन में नहीं पिछड़ते, बल्कि आत्मविश्वास की कमी के कारण पिछड़ जाते हैं। जहां एक नेत्रहीन अथवा दोनों कृत्रिम पैरों के सहारे कोई व्यक्ति एवरेस्ट पर पहुंचने में सफलता प्राप्त कर सकता है तो क्या हम जीवन में आने वाली छोटी-मोटी बाधाओं को भी पार नहीं कर सकेंगे?

महान कार्य करने के लिए विशेष शारीरिक क्षमता अथवा विशिष्ट ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। आत्म-विश्वास के कारण ही व्यक्ति नए विश्व कीर्तिमान स्थापित करने में सक्षम होता है अथवा किन्हीं क्षणों में अभूतपूर्व कार्य कर बैठता है। ज्यादा सोचने-विचारने की बजाय अपने आत्म-विश्वास को मजबूत कीजिए। आपका आत्म-विश्वास कि ‘मैं कर सकता हूं’ मुश्किल से मुश्किल कार्य आपसे अपने आप करवा लेगा और आपको पता भी नहीं चलेगा कि कार्य कैसे हो गया।