जबलपुर। जिले की आठ सीटों में से दो ऐसी सीटें हैं जिनकी चर्चा इन दिनों जोरों पर है। ये दो सीटें भाजपा और कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। जिले की उत्तरमध्य विधानसभा और पनागर सीट से उतरे दो निर्दलीय उम्मीदवारोें की जीत के कयास लगाए जा रहे हैं। पनागर सीट से भरत यादव और उत्तर सीट से धीरज पटेरिया के मैदान मारने की चर्चा जोरों पर है। दोनों ही उम्मीदवार भाजपा के बागी नेता हैं, जो पार्टी के लिए मुसीबत बन गए हैं। हालाकि ११ दिसंबर को नतीजे घोषित होंगे लेकिन इन दो सीटों पर सबकी नजर होगी।
पनागर से भाजपा के बागी भरत यादव और उत्तर से भाजपा के बागी धीरज पटेरिया मैदान में हैं। बाकी सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। लेकिन पनागर और उत्तर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के कयास लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि इन दो सीटों पर भाजपा के बागी दोनों दलों पर भारी पड़ेंगे। यह भी कहा जा रहा है कि यदि बागी नहीं जीतेंगे तो भी ये भाजपा को ही नुकसान पहुंचाएंगे।
पनागर सीट पर जातीय समीकरण.................
राजनीति के विश्लेषकों का मानना है कि पनागर सीट पर जातिगत आधार पर वोटिंग हुई है। जातीय समीकरण भरत यादव की तरफ इशारा कर रहे हैं। जबकि भाजपा और कांग्रेस को यहां पर तगड़ा नुकसान होने के कयास लगाए जा रहे हैं। इस सीट पर पिछड़े वर्ग के वोटों की संख्या ५० हजार से भी अधिक है। हालाकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही यहां दावा कर रहे हैं कि समीकरण उनके पक्ष में हैं। लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि मुकाबला यहां त्रिकोंणीय है। किसी भी उम्मीदवार की जीत संभव है। भाजपा की ओर से यहां पुराने प्रत्याशी इंदु तिवारी और कांग्रेस के सम्मति सैनी मैदान में हैं। 
उत्तरमध्य सीट पर पेंच..................
शहर की उत्तरमध्य सीट की चर्चा इन दिनों चारों ओर हो रही है। यहां से भाजपा की शाख दाव पर लगी है। भाजपा ने यहां से राज्यमंत्री शरद जैन को टिकट दिया है। वहीं कांग्रेस ने यहां पर विनय सक्सेना को टिकट दिया है। कहा जा रहा है कि यहां पर भाजपा व कांग्रेस पर निर्दलीय प्रत्याशी भारी पड़ सकता है। इस सीट पर भाजपा से बगावत करके मैदान में उतरे धीरज पटेरिया की जीत के कयास लगाए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस से नाराज वोटर धीरज के पक्ष में गए हैं। जिसका सीधा लाभ पटेरिया को मिला है। वहीं भाजपा के अंदर भीतरघात की खबरें भी आ रही हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा नेता यहां पटेरिया के लिए काम कर रहे थे। जिससे यह कहा जा रहा है कि पटेरिया भाजपा की वोटों को सेंध लगा चुके हैं। हालाकि नतीजे ११ दिसंबर को घोषित होंगे। जिसके बाद स्पष्ट हो पाएगा कि कौन कहां कितना मजबूत है।
पाटन सीट की चर्चा............... 
जिले की आठ सीटों में से पाटन सीट को लेकर भी अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। यह सीट इसलिए खास है क्योंकि यहां से भाजपा के पूर्व केबिनेट मंत्री अजय विश्नोई इस बार फिर मैदान में हैं। विश्नोई पिछला चुनाव इसी सीट पर कांग्रेस के नीलेश अवस्थी से हार गए थे। चुनाव के पूर्व में विश्नोई इस सीट पर उतरना नहीं चाह रहे थे, लेकिन पार्टी ने विश्नोई को ही इस सीट की जिम्मेदारी दी। अब देखने वाली बात यह होगी कि पूर्व मंत्री इस सीट पर क्या करिश्मा दिखा पाते हैं। वहीं कांग्रेस भी इस सीट पर जीत का दावा कर रही है।