वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ज्ञान, विद्या और सौभाग्य देनेवाला ग्रह है बृहस्पति। साथ ही अच्छी सेहत के लिए भी बृहस्पति का अच्छा होना जरूरी माना जाता है। कहा जाता है कि यदि व्यक्ति की कुंडली में बृहस्पति अनुकूल स्थिति में न हो तो उसे जीवनभर मान-सम्मान और संपत्ति के अभाव का सामना करना पड़ता है। ज्योतिषशास्त्र में जहां ग्रहों की अनुकूलता और प्रतिकूलता के प्रभावों के बारे में बताया गया है, वहीं प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल करने के तरीके भी बताए गए हैं। बृहस्पति को अनुकूल करने के लिए आमतौर पर पुखराज पहनने की सलाह दी जाती है लेकिन अगर आप इसे नहीं पहनना चाहते हैं तो केसर आपके लिए कहीं ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है। आइए, जानते हैं कि कैसे केसर की सहायता से बृहस्पति को अनुकूल बनाकर बिगड़ी किस्मत को संवार सकते हैं…

 

केसर को न केवल पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है बल्कि रसोई के लिए यह एक उपयोगी मसाला भी है। ज्योतिषशास्त्र में इसे गुरु से संबंधित वस्तु माना गया है जो गुरु के रत्न पुखराज की तरह ही गुरु के शुभ प्रभाव को बढ़ाने का काम करता है।

 

केसर का उपयोग पाउडर और रेशे (थ्रेड) के रूप में किया जाता है। इसे पानी में भिगोने पर यह सुंगध और रंग देती है। भारत में कश्मीर में सबसे ज्यादा केसर की खेती होती है। इसके अतिरिक्त स्पेन और ईरान में केसर की बड़े स्तर पर पैदावार होती है।

 

नवग्रहों में गुरू के रूप में मान्य बृहस्पति को शुभ ग्रह माना गया है। कुण्डली में इनकी स्थिति और गोचर से जीवन में विभिन्न तरह की स्थितियां आती रहती हैं। गुरु से प्रभाव से शिक्षा, धन, पारिवारिक जीवन और कई चीजें प्रभावित होती हैं इसलिए गुरु को शुभ बनाए रखना जरूरी माना गया है। इस कार्य में केसर बहुत ही कारगर होता है।

 

जीवन में सभी मंगल कार्य होते रहे इसके लिए बृहस्पति का उच्च स्थिति में होना बेहद जरूरी है। क्योंकि बृहस्पति अथवा गुरु ग्रह को मांगलिक कार्यों का कारक माना जाता है। गुरु को अनुकूल करने के लिए केसर का तिलक रोज लगाना चाहिए। केसर का एक रेशा लेकर एक कटोरी में रखें और उसके ऊपर एक-दो बूंद पानी डालें, ये अपना रंग छोड़ने लगेगी, फिर सीधे हाथ की रिंग फिंगर से तिलक लगाएं।

 

गुरुवार को स्नान आदि के बाद केले के पौधे के पास देसी घी का दीपक जलाएं। केसर का का तिलक लगाएं, केसर के दूध, केसर की खिरनी, केसर की खीर, केसर की मिठाई में से किसी भी एक चीज का दान करें।

 

अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो चांदी की एक ठोस गोली लें, इस ठोस गोली को चांदी की ही डिब्बी में केसर के साथ रख दें और इस डिब्बी को धन रखने के स्थान पर या ऐसी साफ-सुथरी जगह रखें, जहां बाहरी लोगों की नजर न जाए। आपको लाभ होगा।

 

अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो आप प्रत्येक मंगलवार को लाल चंदन और केसर मिलाकर हनुमानजी को तिलक लगाएं। आपके कष्ट दूर होंगे।

 

 

जिन महिलाओं के परिवार में लड़ाई-झगड़ा रहता है, मान-सम्मान की कमी रहती है या पति से अनबन होती रहती है, उन्हें श्रृंगार के सामान के साथ केसर की डिब्बी किसी महिला को दान करना चाहिए।

 

 

घर में नकारात्मकता कभी न आए और सुख-समृद्धि बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि आप अपने घर के मुख्य द्वार पर केसर से स्वास्तिक बनाएं। इससे आपके घर में लक्ष्मी माता का वास रहेगा और दरिद्रता दूर होगी। साथ ही घर में धन का अभाव नहीं होगा।

 

अगर लाख मेहनत के बाद भी आपके पास धन का अभाव रहता हो तो आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार को पूजा-पाठ करें और गुरु बृहस्पति, मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए अपने माथे पर केसर का तिलक लगाएं। इस उपाय को नियमित रूप से करने पर आपके लिए आय के नए स्त्रोत खुलेंगे और धीर-धीरे आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर बनती जाएगी ।

 

अगर आपको लगता है कि किसी ने आपके घर पर कोई जादू-टोना कर रखा है तो केसर के साथ जावित्री और गुग्गुल मिलाकर धूप बना लें। इस धूप को गुरुवार से शुरू कर 21 दिन घर में जलाएं और पूरे घर में घुमाएं आपके घर से तंत्र क्रिया का असर खत्म हो जाएगा और सुख-समृद्धि बनी रहेगी।

 

अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति अशुभ स्थिति में है तो केसर का टीका मस्तक, हृदय और नाभि पर लगाएं। ऐसा शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरू कर पूरे एक साल तक करें। बृहस्पति अनुकूल होकर आपको शुभ फल प्रदान करेंगे।

 

अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए आप गुरुवार को नहाते समय पानी में एक चुटकी हल्दी डाल लें और फिर इस पानी से स्नान करें। नहाने के बाद केले के पेड़ के पास देसी घी का दीपक जलाएं, गुड़ और चना अर्पित करें। केसर का टीका लगाएं। साथ ही ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करते रहें। आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। यह क्रिया शुक्ल पक्ष के गुरुवार से शुरू करें।

अगर आपके दांपत्य जीवन में किसी तरह का तनाव रहता है या कलहपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ रहा हो तो अपने माथे, दिल और नाभि पर केसर का तिलक लगाएं और केसर मिश्रित दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें। ऐसा लगातार करने पर 2 से 3 महीने के अंदर प्रभाव दिखना शुरू हो जाता है, ऐसी मान्यता है।