हर कोई चाहता है उसके घर में हमेशा लक्ष्मी का वास हो, ताकि उसके जीवन में कभी पैसों संबंधी कोई कमी न हो। परंतु माता लक्ष्मी तो चंचला देवी हैं, इसलिए ये कभी किसी जगह पर स्थिर नहीं रहती। कहा जाता है जब लक्ष्मी एक स्थान से चली जाती है तो उस स्थान पर अलक्ष्मी का निवास हो जाता है। परंतु लक्ष्मी की अलक्ष्मी को कोई भी पसंद नहीं करता। पर एेसा क्यों, क्या आपने कभी सोचा है कि आख़िर क्यों अलक्ष्मी को लोग पसंद नहीं करते। तो आईए जानते हैं कि इससे संबंधित कथा -

सुख और सौभाग्य की देवी है लक्ष्मी
हिंदू धर्म के अनुसार लाल कपड़ों, आभूषणों से सजी, कमल पर बैठी, सोने और अनाज से भरा बर्तन हाथों में लिए देवी लक्ष्मी को सुख, समृद्धि, शक्ति की देवी कहा गया है जिसे संस्कृति प्रकृति से प्राप्त करती है। वह अति सम्मोहक और चंचल हैं। कहते हैं उन्हें हमेशा पास रखना एक सतत संघर्ष है। तो दूसरी ओर उनके बगल में बैठी उनकी जुड़वां बहन अलक्ष्मी को गरीबी, दुख और दुर्भाग्य की देवी कहा गया है। शक्ति, सुख और समृद्धि के साथ आता है भोग से उत्पन्न कचरा, चिपचिपे द्रव्य के रूप में जिसे हलाहल कहते हैं।


समुद्र मंथन से हुआ था उत्पत्ति
कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार जिस मंथन के दौरान लक्ष्मी प्रकट हुईं उसी मंथन में हलाहल भी आया। लक्ष्मी को तो सब चाहते थे लेकिन कोई भी हलाहल नहीं लेना चाहता था। शिव वैश्विक चीजों के प्रति उदासीन हैं इसलिए वह इच्छित और अवांछित चीजों में फर्क नहीं करते हैं। उनकी दृष्टि में हलाहल भी अमृत से अलग नहीं है इसलिए वे पूरा विष पी जाते हैं और नीलकंठ कहलाते हैं।

न करें इन चीजों की अनदेखी
वैष्णव साहित्य में हालाहल को अलक्ष्मी से जोड़ कर देखा गया है जो दुर्भाग्य और दारिद्रय की देवी हैं और लक्ष्मी की जुड़वां बहन हैं। जैसे कोई भी शानदार चीज़ बिना कचरा पैदा किए नहीं बनती, वैसे ही लक्ष्मी के साथ हमेशा अलक्ष्मी भी होती हैं। एेसा कहा जाता है कि जो व्यक्ति इन दोनों यानि लक्ष्मी और अलक्ष्मी की अनदेखी करता है उसका बहुत बुरा हाल होता है। अलक्ष्मी दुख की देवी हैं और जब तक व्यक्ति इन्हें स्वीकार नहीं करता तब तक उसकी किस्मत हमेशा अपने साथ उसका नाश लेकर आती है।

किन पर बरसती है मां लक्ष्मी की कृपा
हिंदू धर्म के ग्रंथों में एक कथा के अनुसार लक्ष्मी और अलक्ष्मी दोनों बहनों ने एक बार किसी व्यापारी से पूछा कि उन दोनों में से कौन अधिक सुंदर है। व्यापारी समझदार था और अच्छी तरह से जानता था कि किसी एक का भी अपमान करना उस पर बहुत हावी पड़ सकता है। इसलिए उसको किसी को भी नाराज़ न करते अपना नतीजा सुनाना होगा। जिसके बाद उसने अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए कहा, लक्ष्मी घर में आती हुई अच्छी लगती हैं जबकि अलक्ष्मी घर से बाहर जाती हुई। लोग मान्यता है यही वजह है कि लक्ष्मी व्यापारियों पर कृपालु रहती हैं।

मिष्ठान्न हैं माता को प्रिय
ज्योतिष के अनुसार देवी लक्ष्मी का संबंध मिष्ठान्न से है जबकि अलक्ष्मी खट्टी और कड़वी चीज़े बेहद पसंद है। यही वजह है कि मिठाई घर के भीतर रखी जाती है जबकि नीबू और तीखी मिर्ची घर के बाहर टंगी हुई पाई जाती है। लक्ष्मी मिठाई खाने घर के अंदर आती हैं जबकि अलक्ष्मी द्वार पर ही नींबू और मिर्ची खा लेती हैं और संतुष्ट होकर लौट जाती हैं। दोनों को ही स्वीकार किया जाता है पर स्वागत एक का ही होता है।