हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बहुत महत्व दिया जाता है। इस दिन को अधिक पावन और शुभ माना जाता है। इतना ही नहीं कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा का ये दिन हिंदू धर्म के सभी त्योहारों में से एक प्रमुख त्योहार बताया गया है। कार्तिक पूर्णिमा का ये त्योहार देव दीपावली के नाम से प्रसिद्ध है। बता दें कि ये दिवाली के 15 दिन बाद मनाया जाता है। वैसे तो ये त्योहार भारत के हर गंगा घाट पर मनाया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बनारस शहर में इसे बड़े ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। किंतु शायद ही किसी को पता होगी कि आख़िर क्यों केवल बनारस में ही इसे इतने धूम-धाम से मनाया जाता है।कार्तिक पूर्णिमा के कुछ दिन पहले देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु 4 महीने की निद्रा के बाद जागते हैं। जिसकी खुशी में सभी देवता स्वर्ग से उतरकर बनारस के घाटों पर दीपों का उत्सव मनाते हैं। एक अन्य मान्यता ये भी है कि दीपावली पर माता लक्ष्मी अपने प्रभु भगवान विष्णु से पहले जाग जाती हैं, इसलिए दीपावली के 15वें दिन कार्तिक पूर्णिमा के दिन देवताओं की दीपावली मनाई जाती है।वहीं एक किवदंती के मुताबिक तीनों लोको में त्रिपुरासुर राक्षस का आंतक था। तब भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन काशी में पहुंच कर त्रिपुरासुर राक्षस का वध कर सभी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इससे प्रसन्न होकर सभी देवताओं ने स्वर्ग लोक में दीपोत्सव मनाया था।एेसा कहा जाता है कि देव दिवाली की परंपरा सबसे पहले बनारस के पंचगंगा घाट पर हजारों की संख्या में दिए जलाकर की गई थी। तब से लेकर आज तक बनारस में भव्य तरीके से घाटों को दीयों से सजाया जाता है।एेसा भी कहा जाता है कि काशी में शहीदों को समर्पित करने के लिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन बहुत भव्य तरीके से देव दिवाली मनाई जाती है।