श्री बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार 20 नवंबर को शायंकाल 3 बजकर 21 मिनट पर बंद हो गए। इस अवसर पर श्री बदरीनाथ मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था। कपाट बंद होने के अवसर पर दर्शन के लिए करीब 5237 तीर्थयात्री पहुंचे थे। जबकि पूरे यात्रा वर्ष में इस साल 1 लाख, 58 हजार 490 तीर्थयात्री बदरीधाम पहुंचे।
कपाट बंद होने की प्रक्रिया तीन दिन पहले पंच पूजाओं के साथ शुरु हो गई थी। कपाट बंद होते समय रावल जी द्वारा भगवान बदरीविशाल को माणा गांव से अर्पित घृत कंबल ओढ़ाया गया। भगवान को शीत से बचाव हेतु सदियों से इस धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया जाता रहा है।

आदि गुरु शंकराचार्यजी की गद्दी जोशीमठ, श्री उद्धवजी एवं कुबेरजी की डोली पांडुकेश्वर के लिए कल बुधवार को प्रस्थान करेगी । शंकराचार्य की गद्दी 21 नवंबर योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर प्रवास के पश्चात 22 नवंबर दोपहर को नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेगी जबकि श्री उद्वव जी एवं श्री कुबेर शीतकाल में पांडुकेश्वर में प्रवास करेंगे। इसी के साथ योगध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर एवं नृसिंह मंदिर जोशीमठ में भगवान बदरीविशाल की शीतकालीन पूजाएं भी शुरू हो जाएगी।
मंगलवार को स्वामी रामदेव, स्वामी अवधेशानंद गिरी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट, मंदिर समिति निवर्तमान सदस्य दिवाकर चमोली, शिवसिंह रावत, राकेश डिमरी दर्शन को पहुंचे। इस अवसर पर श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्यकार्याधिकारी बी.डी.सिंह, रावल ईश्वरी प्रसाद नंबुदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल विपिन तिवारी सुनील तिवारी, मोहन सती, राजेन्द्र चौहान, डा.हरीश गौड़, पीतांबर मोल्फा, प्रकाश भंडारी आशुतोष डिमरी, दिनेश डिमरी भागवत पंवार, कोतवाल अनिल जोशी मौजूद रहे।

इस अवसर पर श्री बदरीनाथ मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था कपाट बंद होने के अवसर हेतु 5237 तीर्थयात्री पहुंचे। पूरे यात्रा वर्ष में इस साल 1 लाख, 58 हजार 490 तीर्थयात्री बदरीधाम पहुंचे।