मुंबई, केन्द्रीय रिजर्व बैंक और केन्द्र में सत्तारूढ़ मोदी सरकार के बीच खींचतान के बीच सोमवार को हुई आरबीआई बोर्ड बैठक खत्म हो चुकी है. दिनभर चली इस मैराथन बैठक में कई अहम मसलों पर चर्चा के साथ उन सभी मुद्दों पर बात हुई जिसके चलते बीते दिनों केन्द्र सरकार और आरबीआई के बीच खींचतान देखने को मिल रही थी. केन्द्रीय बैंक इको कैप फ्रेमवर्क के लिए एक्सपर्ट समिति गठित करेगा.

एक्सपर्ट समिति केन्द्र सरकार के साथ विवादित मुद्दों को सुलझाने के लिए काम करेगी. इस समिति का गठन केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक मिलकर करेंगे. गौरतलब है कि हाल में केन्द्र सरकार और आरबीआई के बीच केन्द्रीय बैंक के रिजर्व पैसे को लेकर विवाद सामने आया था. खबरों के मुताबिक केन्द्र सरकार का दावा था कि रिजर्व बैंक जरूरत से अधिक पैसा अपने रिजर्व में रख रहा है. जबकि इस पैसे का इस्तेमाल अर्थव्यवस्था में किया जा सकता है. इस मुद्दे पर अब नई एक्सपर्ट समिति फैसला करेगी.

इसके अलावा आरबीआई बोर्ड ने केन्द्रीय बैंक को सलाह दी है कि वह मीडियम एंड स्मॉल सेक्टर इंडस्ट्री को राहत पहुंचाने के लिए फॉर्मूला तैयार करे. इसके तहत एमएसएमई सेक्टर को रिजर्व बैंक 25 करोड़ तक के कर्ज के लिए एक नई स्कीम भी लाने पर काम करेगा.
हालांकि दिनभर चली बैठक के बाद केन्द्रीय रिजर्व बैंक ने प्रेस रिलीज के जरिए बताया कि वह नवंबर के दौरान ओपन मार्केट में 80 बिलियन रुपये (8,000 करोड़) के गवर्नमेंट सिक्योरिटी बॉन्ड खरीदने के लिए तैयार है. गौरतलब है कि इस फैसले से देश में एनबीएफसी (नॉन बैंकिंग फाइनेंनशियल कंपनियों) के नकदी संकट को दूर किया जा सकेगा और देश में कारोबारी तेजी के लिए नया कर्ज देने का काम शुरू किया जा सकेगा.

बहरहाल, रिजर्व बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स कुछ मुद्दों पर आपसी सहमति तक पहुंच गए हैं. बैठक में वित्त मंत्रालय के नामित निदेशक और कुछ इंडिपेंडेंट डायरेक्टर गवर्नर उर्जित पटेल और उनकी टीम पर एमएसएमई को कर्ज से लेकर केंद्रीय बैंक के पास उपलब्ध कोष तक अपनी बात रखी. इसके साथ ही बैठक के दौरान अर्थव्यवस्था में कैपिटल फ्रेमवर्क पर अहम चर्चा की गई.

रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने भी कुछ वर्गों का दबाव होने बावजूद इस्तीफा देने के बजाय केंद्रीय बैंक की नीतियों का पक्ष मजबूती से रखा. सूत्रों के मुताबिक बैठक में एनपीए को लेकर केंद्रीय बैंक बैंक ने अपनी कड़ी नीतियों का बचाव किया. बैठक के दौरान इस विषय पर भी अहम चर्चा की गई कि बैंकों के लिए नियमों को सरल करने का रास्ता कैसे निकाला जा सकता है.

गौरतलब है कि नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के प्रावधानों को लेकर गवर्नर पटेल के साथ चार डेप्युटी गवर्नर संयुक्त रूप से पक्ष रखने वाले थे. उम्मीद जताई गई थी कि कुछ इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स गवर्नर के पक्ष का समर्थन कर सकते हैं. वहीं बैठक से पहले माना जा रहा था कि आरबीआई बोर्ड में वित्त मंत्रालय द्वारा नामित सदस्य रिजर्व बैंक की नीति पर सरकार का पक्ष रखते हुए विरोध जताएंगे. सूत्रों की मानें तो एनपीए की समस्या पर केन्द्रीय बैंक की मौजूदा समिति काम करेगी और इस मामले में बैंकों के लिए राहत लाने की दिशा में आगे बढ़ेगी.

रिजर्व बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में 18 सदस्य हैं. हालांकि, इसमें सदस्यों की संख्या 21 तक रखने का प्रावधान है. सदस्यों में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और चार अन्य डेप्युटी गवर्नर पूर्णकालिक आधिकारिक निदेशकों ने हिस्सा लिया. इनके अलावा सरकार की तरफ से नामित अन्य 13 सदस्य बैठक में शामिल हुए. नामित सदस्यों में वित्त मंत्रालय के 2 अधिकारी आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार शामिल हैं.

गौरतलब है कि एनपीए के खिलाफ केन्द्रीय बैंक के सख्त नियमों का असर फिलहाल 21 सार्वजनिक बैंकों में से 11 बैंकों पर पड़ रहा है और ये बैंक पीसीए के दायरे में हैं. जिससे उन पर नए कर्ज देने को लेकर कड़ी शर्तें लागू हैं. इन बैंकों में इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉर्पोरेशन बैंक, आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सैंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, आरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स, देना बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र शामिल हैं.