जयपुरः अपनी जमीन की तलाश में राजस्थान में जातीय और धार्मिक समीकरणों को नजर में रखते हुए कांग्रेस ने 15 मुस्लिम कैंडिडेट्स को आगामी विधानसभा चुनाव में उतारा है.  पिछली बार के चुनाव में भी कांग्रेस ने इतने की उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था लेकिन बीजेपी की हवा और कांग्रेस के प्रति असंतोष के चलते सभी अपनी सीट हार गई थी. 

पिछली बार 2014 में राजस्थान में बीजेपी ने चार मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया, जिसमें से दो सीटें बीजेपी ने अपने कब्जे में ली थी. इस बार बीजेपी ने परिवहन मंत्री यूनुस खान को ही मुस्लिम चेहरे के रूप में टिकट दिया है. यूनुस खान  बीजेपी ने टोंक से टिकट दिया है और उन्हें कांग्रेस के दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार सचिन पायलट के खिलाफ मैदान में उतारा है. 
पिछले चुनाव में यूनुस खान डीडवाना सीट से जीतकर विधानसभा तक पहुंचे थे. बीजेपी ने टोंतक सीट के नाम की घोषणा अंतिम समय पर की जब कांग्रेस ने तय किया कि सचिन पायलट भी चुनाव लड़ेंगे. मुस्लिम बाहुल्य टोंक सीट पर इससे पहले अजीत सिंह मेहता जीत कर विधानसभा में पहुंचे थे. 

पिछले चुनाव के 8 मुस्लिम उम्मीदवारों ने इस बार भी कांग्रेस ने टिकट दिया है जो कि पिछली बार चुनाव हार गए थे. 15 उम्मीदवारों में कांग्रेस ने 3 महिलाओं को टिकट दिया है जिनमें से दो, साफइया और गुलनाज पिछली बार के चुनाव में हारे उम्मीदवारों की पत्नियां हैं. 
बीजेपी ने अपने पिछली विधानसभा के दूसरे मुसलमान चेहरे हबीबुर रहमान का टिकट काट दिया, इससे नाराज होकर उन्होने कांग्रेस ज्वाइन की और अब वो इश बार नागौर से कांग्रेस के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. गहलोत सरकार में रहमान वक्फ मंत्री भी रहे थे और पिछले चुनाव में कांग्रेस से टिकट ना मिलने रहमान कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए थे और इस बार फिर से कांग्रेस का दामन थाम लिया है. 

टिकटों के लिए मचे घमासान और कांग्रेस में टिकटों को लेकर आखिरी समय तक मंथन और पायलट -गहलोत खेमेबाजी के बीच वसुंधरा सरकार से टक्कर ले रही कांग्रेस के नए उम्मीदवार क्या रंग दिखाते हैं ये देखने वाली बात होगी. दोनों पार्टियों ने चुनाव प्रचार में अपनी सारी ताकतें झोंक दी हैं, सभी अपने स्टार प्रचारकों के साथ वोटों को साधने में लगे हुए हैं. सत्ता का उंट किस करवट बैठेगे ये तो 7 दिसंबर की वोटिंग औऱ 11 दिसंबर को आने वाले चुनाव परिणाम से ही पता चलेगा.