भोपाल ।  बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग एवं संस्था निवसीड बचपन के संयुक्त तत्वाधान में बाल श्रम विरोधी अभियान पर एक दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस मौके पर विभागाध्यक्ष डॉ.अरविन्द चौहान ने कहा की बाल श्रम की समस्या को जड़ से समाप्त करने के लिए व्यापक जन जागरूकता की जरूरत है।आपने छात्र छात्राओं से बालश्रम को समाप्त करने के लिए आगे आने की अपील की।  
परिचर्चा में बाल श्रम के सामाजिक दृष्टीकोण पर डॉ. रूचि घोष ने कहा की बालश्रम की समस्या को सामाजिक स्थिति का समग्र आंकलन करके ही सुधार जा सकता है इसके लिए सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक व्यवस्था को समझने की पहल करनी होगी ।श्रम विभाग के प्रतिनिधि मयंक दीक्षित ने कहा की सरकार के साथ छात्रों और संस्थाओं को भी बाल श्रम उन्मूलन के लिए प्रयास करना होगा ।आपने माना की वर्तमान में राज्य में बालश्रमिकों के सही आंकड़ों एवं संसाधनों की कमी है।  
बालश्रम निदान के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान हो -
इस मौके पर डॉ.शशांक शेखर ठाकुर ने कहा की संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करने देना चाहिए ।साथ ही राजनीतिक दलों को बाल श्रम के निदान और पुनर्वास के लिए इच्छाशक्ति दिखानी होगी ।समाजकर्मी संजय सिंह ने कहा  की समाज और सरकार को बालश्रम के उन्मूलन के लिए संवेदनशीलता के साथ पर्याप्त बजट की व्यवस्था करनी होगी ।आरम्भ संस्था की निदेशक अर्चना सहाय ने कहा की  संस्थाओं के प्रयास से कई बच्चों का जीवन बेहतर हुआ है फिर भी कई बच्चे आज भी असुरक्षा में जी रहे हैं। 
सेव द चिल्ड्रेन के राज्य प्रतिनधि प्रदीप नायर ने कहा की राज्य सरकार टास्क फ़ोर्स का गठन करे और एस ओ पी के अनुसार कार्य किया जाये। एड एट एक्शन के प्रवीण भोपे ने बालश्रमिक बच्चों के जातिगत सामाजिक दृष्टिकोण से अध्ययन की जरूरत बताई ।रोटरी क्लब के राजकुमार राय के अनुसार बच्चों के स्वास्थ्य और कुपोषण जैसी समस्या पर ध्यान देना होगा ताकि एक स्वस्थ्य समाज तैयार हो सके आपने बालश्रमिक बच्चों के स्वास्थ्य पर चिंता प्रकट की ।मुस्कान संस्था की सबा ने परंपरागत और घरेलु काम में लगे बच्चों की देखरेख सुरक्षा का सवाल उठाया। 
गरीबी और आर्थिक असमानता के कारण बच्चे हैं बालश्रमिक  –
संस्था निवसीड बचपन के कार्यक्रम समन्वयक सत्येन्द्र पाण्डेय ने प्रेजेंटेशन में बताया की बड़ों को रोजगार की कमी और बढती गरीबी के कारण बच्चे स्कूल छोड़कर कामकाजी जीवन गुजार रहे हैं ।आपने 157 कामकाजी बच्चों पर किये एक अध्ययन के हवाले से कहा की असंगठित श्रमिकों के बच्चे 40 तरह के कामकाज में लगे हुए हैं ।परिचर्चा में हिस्सा लेते हुए समाजकार्य की छात्रा सविता सिंह ने कहा की परिवार ने बच्चों को कमाने का जरिया बना लिया है इसलिए उन्हें अपना माईंड सेट चेंज करना होगा ।राखी सिंगारे के अनुसार बालश्रम के मामले में कठोरता दिखानी होगी ।वहीँ सरिता के अनुसार गरीबी और आर्थिक असमानता को खत्म किये बिना बालश्रम समाप्त नहीं किया सकता। 
परिचर्चा में चाइल्ड लाइन , मुस्कान ,एंजल संस्था प्रतिनिधियों तथा रामकुमार विद्यार्थी , राखी रघुवंशी , सुनील गावंडे , राजीव भार्गव , रमेश मायवाड , ऋतू , रिंकू सहित 40 लोगों ने हिस्सा लिया ।