यूं तो सामान्यजन के लिए मन को जीत पाना कठिन ही होता है पर मुश्किल नही। बिना मन को जीते जीवन में शांति सम्भव नहीं है। अशांति का कारण हमारी असीमित इच्छाएं ही हैं और इसके मूल में कोई बाहरी तत्व नहीं होता बल्कि हमारा अपना मन ही हैं। अन्य व्यक्ति तो हमें जीवन में महज 5 से 10 फीसद ही कष्ट दे सकता है, जबकि 90 से 95 फीसद हम खुद के द्वारा दुःख प्राप्त करते हैं। जिसने मन को साध लिया उसे किसी और को साधने की आवश्यकता नहीं है। बात साफ है कि जिसने स्वयं को जान लिया, पहचान लिया उसे किसी और को जानने और पहचानने की इच्छा नहीं रह जाती है, जिसने मन पर विजय हासिल कर ली उसे किसी और पर विजय हासिल करने की आवश्यकता भी नहीं होती है। वर्तमान समाज में जो हिंसा और क्लेश समेत अशांति का वातावरण बनता चला जा रहा है, उसके पीछे मुख्य कारण मन का भटकाव ही है। मन के वशिभूत होकर ही मानव यहां से वहां भटकता रहता है। आज छोटी-छोटी बातों पर घर-परिवार में जो अशांति व क्लेश नजर आ रहे हैं। उसका समाधान कहीं और नहीं मिलेगा बल्कि आपके स्वयं के अंदर मौजूद है। इसके लिए जरुरी है कि अपने मन को थोडा बड़ा और मजबूत करें। जिस दिन आपने मन को साधने की कला सीख ली उसी दिन आप देखेंगे कि सबकुछ अपने आप ही सधता चला जा रहा है। इसलिए तो कहा गया है कि मन के साधे सब सधे, सबके साधे सब जाए।