नई दिल्ली । महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय ने निभNया फंड से देशभर में १०२३ फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने यह कदम बच्चियों व महिलाओं से दुष्कर्म के लंबित मामलों के निपटारे के लिए उठाया है। जुलाई में कानून एवं न्याय मंत्रालय ने देश में १००० से अधिक ऐसे न्यायालयों की स्थापना करने का प्रस्ताव किया था। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति ने शुक्रवार को इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।
डब्ल्यूसीडी मंत्रालय की ओर से बयान जारी कर उपरोक्त जानकारी दी है। महिला एवं बाल विकास सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति ने निर्भया फंड के अंतर्गत तीन अहम प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है। इनमें दुष्कर्म एवं पोक्सो एक्ट के तहत लंबित मामलों के निपटारे के लिए १०२३ फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाना प्रमुख है। इन अदालतों के गठन पर कुल ७६७.२५ करोड़ रु खर्च होने का अनुमान है। इसमें पहले चरण के दौरान ९ राज्यों में ७७७ फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में शेष २४६ अदालतों की स्थापना होगी। 
    मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति ने जिस दूसरे प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है, उसके तहत यौन उत्पीड़न के मामलों की जांच में इस्तेमाल के लिए फोरेंसिक किट का खरीदा जाना शामिल है। इस पर १०७.१९ करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उच्चस्तरीय समिति ने १७.६४ करोड़ रुपये की लागत से कोंकण रेलवे द्वारा ५० रेलवे स्टेशनों पर वीडियो सर्विलांस सिस्टम स्थापित करने के प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी प्रदान की। ध्यान रहे १६ दिसंबर, २०१२ के जघन्य दिल्ली दुष्कर्म कांड के बाद केंद्र सरकार ने २०१३ में निर्भया फंड की स्थापना की। इस फंड का इस्तेमाल महिला सुरक्षा से जुड़े कार्यो के लिए किया है। 
    राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) में ३ नए सदस्यों को मनोनीत किया गया है। महिला एवं बाल विकास (डब्ल्यूसीडी) मंत्रालय ने चंद्रमुखी देवी, सोसो शैजा और कमलेश गौतम को आयोग का सदस्य नियुक्त किया है। मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी है। राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम १९९० की धारा ३ का इस्तेमाल करते हुए बिहार की चंद्रमुखी देवी, मणिपुर की सोसो शैजा और उत्तर प्रदेश में कानपुर की कमलेश गौतम को आयोग का सदस्य मनोनीत किया है। सभी मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल कार्यभार संभालने की तिथि से तीन वर्षो की अवधि या ६५ वर्ष की आयु तक या अगले आदेश तक रहेगा।