ग्वालियर। हाईकोर्ट की युगलपीठ में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह ने दंड के डर से पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश कर दी। उन्होंने अवमानना के लिए माफी मांगते हुए कहा कि कर्मचारी को समयमान वेतनमान का लाभ दे दिया है। राशि भुगतान के लिए तीन माह का समय दिया जाएगा।

आदेश का पालन होने पर कोर्ट ने अवमानना याचिका का निराकरण कर दिया। दतिया जिले में पदस्थ अपर डिवीजन क्लर्क आदित्य नारायण पुरोहित ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि कोर्ट के आदेश के बाद भी समयमान वेतन का लाभ नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने इस मामले में जब सख्ती दिखाई तो पांच पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट पेश की, जिससे हाईकोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ था।
प्रमुख सचिव गौरी सिंह को तलब किया था। 12 नवंबर को गौरी सिंह से हाईकोर्ट की युगलपीठ ने जब सवाल किया कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया जा सकता है। इसको लेकर कोर्ट नाराज हो गया। कोर्ट ने गौरी सिंह को अवमानना का दोषी मान लिया था। दंड पर सुनवाई के लिए उन्हें बुलाया था।

गौरी सिंह गुरुवार की सुबह कोर्ट में उपस्थित हुईं। उन्होंने आदेश के पालन की जानकारी दी। साथ ही बताया कि रिपोर्ट में टाइपिंग मिस्टेक हो गई है, उसे सुधारना है। कोर्ट ने उन्हें गलती सुधारने के लिए लंच तक का समय दिया। गलती सुधारकर रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी। कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी वीपी सिंह ने की।
इस फैसले का क्या असर

स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों को पदोन्नाति व समयमान वेतन का एक साथ लाभ नहीं दिया जा रहा है, लेकिन यह फैसला होने से कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, क्योंकि कर्मचारी पदोन्नाति के साथ-साथ समयमान वेतनमान मांग रहे हैं। इस तरह के मामलों की संख्या कोर्ट में बढ़ सकती है। क्योंकि कर्मचारियों को आदित्य नारायण पुरोहित के मामले में फैसले का इंतजार था।
क्या है मामला

आदित्य नारायण पुरोहित स्वास्थ्य विभाग में क्लर्क पद पर कार्यरत हैं। शासन ने उन्हें एक पदोन्नाति दी, लेकिन क्रमोन्नाति नहीं की। इसके चलते हाईकोर्ट की एकलपीठ में याचिका दायर की, जिसे एकलपीठ ने खारिज कर दिया। बाद में युगलपीठ में अपील की। युगलपीठ ने समयमान वेतनमान देने का आदेश दिया था।