रायपुर। देवउठनी एवं एकादशी यानी तुलसी विवाह का त्यौहार मनाया जायेगा। कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी का बहुत महत्व होता है। इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीर सागर में चार महीने की निद्रा के बाद जागते है।। कार्तिक माह की एकादशी के दि नही भगवान विष्णु जागते हैं। इनके जागने के बाद सभी तरह के शुभ और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। हालांकि पंडितां के अनुसार इस बार विवाह के कार्य 17 जनवरी से ही शुरू हो पायेंगे। मान्यता है कि अषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु क्षीर सागर में सोने के लिए चले जाते हैं जिसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस दौरान कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किया जाता। इन चार महीनों में पूरी सृष्टि की जिम्मेदारी भगवान शंकर के साथ अन्य देवी-देवताओं के कंधे पर आ जाती है।
देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के जागने के साथ ही सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्यों की शुरूआत होती है। इसकी खुशी में सभी देवी-देवता पृथ्वी पर एक साथ आकर देव दीवाली मनाते हैं जिसका बहुत महत्व होता है। इस बार देवोत्थान एकादशी 19 नवंबर को मनाई जायेगी। दिवाली के समय भगवान विष्णु निद्रा में लीन होते हैं, इसलिए लक्ष्मी की पूजा उनके बिना ही की जाती है। मान्यता है कि देवउठनी ग्यारस को भगवान विष्णु के उठने के बाद सभी देवों ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती उतारी, इसलिए यह देव दिवाली है। इस एकादशी से कई तरह की धार्मिक परंपरायें जुड़ी हैं।