भोपाल । मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा के चुनाव में नोटा को लेकर प्रमुख राजनीतिक दलों की उम्मीदवारों में चिंता स्पष्ट रूप से देखी जा रही हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में नोटा के कारण हार जीत का अंतर बदल गया। जितने वोटों से हार हुई। उससे कहीं ज्यादा नोटा में वोट डाले गए थे। 2013 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में 90 सीटों पर मतदान हुआ था। जिनमें 35 सीटों पर नोटा तीसरे स्थान पर रहा वोट कटवा पार्टी के रूप में नोटा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की हार जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा में पड़े थे। इस बार भी चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के बीच में सबसे ज्यादा भय नोटा का देखने को मिला है। 
भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नोटा से ज्यादा भयभीत हैं। भारतीय जनता पार्टी में इस समय सबसे ज्यादा नाराजगी संघ कार्यकर्ताओं और पार्टी के सामान्य कार्यकर्ताओं के बीच देखने को मिल रही है। हर विधानसभा क्षेत्र से नाराज कार्यकर्ता यह कहते भी पाए जा रहे हैं। जीवन भर कांग्रेस को वोट नहीं दिया, लेकिन इस बार कांग्रेस को वोट तो नहीं देंगे, लेकिन नोटा मे वोट जरुर डालेंगे।
2013 के पहले चुनाव के दौरान अन्य राजनीतिक दल और प्रत्याशी वोट कटवा के रूप में अपनी पहचान बनाते थे। लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है, जो लोग कांग्रेस-भाजपा से नाराज है। वह अपना वोट बिना झिझक नोटा में डाल देते हैं। जिसके कारण 2018 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों की नींद हराम है।