तिरूवनंतपुरम: केरल सरकार इस सप्ताह शुरू हो रहे वार्षिक तीर्थयात्रा सत्र से पहले सबरीमला मंदिर से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के लिए एक सर्व-दलीय बैठक आयोजित कर सकती है. गौरतलब है कि रजस्वला आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सबरीमला मंदिर में गतिरोध जारी है.

देवस्वम मंत्री कडक्कमपल्ली सुरेंद्रन ने कहा,‘हम एक सर्वदलीय बैठक आयोजित करने पर विचार कर रहे हैं. हमने अभी तक एक अंतिम निर्णय नहीं लिया है. ऐसी योजना है....’ सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को पूजा की इजाजत मिलने के खिलाफ लगातार जारी विरोध की पृष्ठभूमि में सबरीमला स्थित भगवान अयप्पा का मंदिर 17 नवंबर को दो महीना के लिए खुलेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर के आदेश में 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था. इस फैसले के खिलाफ कई पुनरीक्षण याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई होगी. सुरेंद्रन ने कहा कि अदालत की सुनवाई के निष्कर्ष के आधार पर सर्व-दलीय बैठक पर निर्णय लिया जाएगा.
यात्रा से पहेल प्रशासन तैयारियों में जुटा
सबरीमला यात्रा शुरू होने में महज छह दिन बचे हैं और प्रशासन भगवान अयप्पा मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को लेकर तमाम इंतजाम करने में जुटा हुआ है. पूजा के लिए सभी आयु वर्ग की महिलाओं को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है.

अक्टूबर और इस महीने की पूजा के दौरान मंदिर के खुलने पर पश्चिमी घाट में पेरियार बाघ संरक्षित क्षेत्र में स्थित मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं. 

बाढ़ से तबाही के बाद पहली बार होगी ‘मंडल मक्कारविलक्कू’ पूजा 
अगस्त में बाढ़ से भीषण तबाही के बाद पहली बार ‘मंडल मक्कारविलक्कू’ पूजा होगी. बाढ़ की वजह से पंबा में ठहरने के स्थान, शौचालय सहित आधारभूत संरचनाओं को बुरी तरह नुकसान पहुंचा. दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान राज्य में सौ साल में आई सबसे भीषण बाढ़ के कारण 490 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और बहुत बड़े पैमाने पर तबाही हुई.

हर दिन 25,000 से एक लाख तक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद
पूजा के दौरान मंदिर में हर दिन 25,000 से एक लाख तक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. पंबा और निकटवर्ती इलाके में सुविधाओं को लेकर श्रद्धालु थोड़े चिंतित भी नजर आ रहे हैं.

हर साल आने वाले श्रद्धालु रघु ने बताया कि बेस कैंप बनाए गए निलक्क्ल में ना तो ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था है ना ही शौचालयों के इंतजाम किये गए हैं. उन्होंने कहा कि महिला श्रद्धालुओं को दिक्कतें हो सकती है.

हालांकि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के अध्यक्ष ए पद्मकुमार ने कहा कि पांच दिनों के भीतर निलक्कल में निर्माण संबंधी सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे.