बीजापुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर में अब तक कई हमलों में एके 47, इंसास, यहां तक कि यूबीजीएल जैसे अत्याधुनिक हथियार लूटने वाले नक्सलियों को मुंहतोड़ जबाव देने के मकसद से पहली बार बीजापुर के जंगल में ऑटोमेटिक बाइक ग्रेनेड लांचर उतारा गया है. खास बात यह कि लांचर की इस तरह की डिजाइन अब तक किसी भी पैरामिलिट्री फोर्स में देखी नहीं गई थी. यह अलग तरह का डिजाइन बीजापुर स्थित सीआरपीएफ 85 बटालियन के सीईओ सुधीर कुमार के दिमाग की उपज है, जिसे सैन्य शक्ति के लिहाज से बड़ी उपलब्धि भी माना जा सकता है.

सीईओ सुधीर कुमार बताते हैं कि यह डिजाइन उन्होंने खुद तैयार किया था. पूरे स्ट्रक्चर को तैयार करने दस दिन लगे. यह डिजाइन अपने आप में अनोखा है. देश में किसी भी फोर्स के पास ऐसा हथियार नहीं है. चूंकि बस्तर में नक्सली गुरिल्ला युद्ध की तर्ज पर हमला करते हैं, इसलिए इस हथियार के बूते अकेला जवान सौ से अधिक नक्सलियों पर भारी पड़ सकता है.

खास बात यह भी कि जहां भारी भरकम लांचर को ले जाने में सहूलियत हो रही है, वहीं जरूरत पड़ने पर ढांचे को बाइक से अलग भी किया जा सकता है. ऑटोमेटिक बाइक ग्रेनेड लॉंचर को डिजाइन ही इस तरह से किया गया है कि इसे दुर्गम से दुर्गम इलाकों तक ले जाने में मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी. मोटरसाइकिल के पिछले पहिये के एक्सल और शॉकअप के सहारे लांचर के पूरे ढांचे को कुशल इंजीनियरिंग का प्रदर्शन करते सेट किया गया है.

लांचर का वजन 10 किलो 2 सौ ग्राम है, इसके अलावा दस राउंड फायर के साथ-साथ विशेषता यह भी है कि यह ग्रेनेड को भस्ट फायर करता है. मारक क्षमता एक किमी के साथ ही आठ मीटर की परिधि तक दुश्मन को चित्त करने की इसमें क्षमता है.

फिलहाल इस हथियार का इस्तेमाल 85वीं बटालियन के जवान ही कर रहे हैं. इसकी डिजाइन और मारक क्षमता को देखकर यकीनन सीआरपीएफ 'डबल पावरफुल' हो गई है. वहीं आज होने वाले मतदान पर अगर नक्सली टेढ़़ी नजर रखते हैं तो एक साथ दो सौ नक्सलियों का रास्ता रोकने के लिए यह एकमात्र हथियार काफी है.